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रांची: झारखण्ड में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाला है। वहीं इस चुनाव के लिए सभी पार्टियां अपनी-अपनी तैयारियों में लगी हुई है। इसी बीच समाजवादी पार्टी ने झारखंड के विधानसभा चुनाव में अपने दम पर 21 प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं। इंडिया गठबंधन के तहत हिस्सेदारी न मिलने पर पार्टी ने अकेले ही ताल ठोक दी है।
सपा बढ़ा सकती है परेशानी
सपा का यह कदम अब झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस गठबंधन के लिए बड़ी चुनौती पैदा कर सकता है। दरअसल, झारखंड में मुसलमानों की आबादी 15 फ़ीसदी है लेकिन विधानसभा में इनका प्रतिनिधित्व न के बराबर रहता है। झारखंड विधानसभा में मुस्लिम विधायकों की संख्या 5 से भी कम है।
जेएमएम को लग सकता है झटका
ऐसे में जेएमएम और कांग्रेस गठबंधन के लिए बीजेपी को टक्कर देने के लिए महतो (कुर्मी) और मांझी (आदिवासी) मतदाताओं का साथ देना बेहद जरुरी है। हालांकि, इन दो बड़े वोटबैंक के साथ-साथ मुस्लिम मतदाताओं के वोट भी जेएमएम के लिए इस चुनाव में प्लस प्वाइंट्स का काम करेंगे। लेकिन अब मुस्लिम वोटर्स की तरफ से जेएमएम को बड़ा झटका लग सकता है।
सपा की एंट्री से समीकरण हुआ दिलचस्प
प्रदेश में सपा के अकेले एंट्री करने से मुस्लिम वोटर्स बंटने की संभावना बढ़ गई है। झारखंड में पहले के चुनावों में मुस्लिम वोट परंपरागत रूप से कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम), और राजद जैसी पार्टियों के बीच बंटते रहे हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी (सपा) की एंट्री ने समीकरण को और दिलचस्प बना दिया है।
इन इलाकों में मुस्लिम मतदाता अधिक
मुस्लिम वोटर्स की अहमियत को जानने के लिए प्रदेश में उनकी स्थिति को जानना बेहद जरुरी है। बता दें कि झारखंड के 7 विधानसभा क्षेत्र ऐसे है, जहां 22% से 38% तक मुस्लिम वोटर्स हैं। इसके अलावा 4 विधानसभा क्षेत्र ऐसे है, जहां मतदाताओं की संख्या 15% से 20% हैं। ऐसे में इन 11 सीटों पर जेएमएम को बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। इन विधानसभा में जामताड़ा, पाकुड़, राजमहल, गोड्डा, मधुपुर, गांडेय और टुंडी शामिल हैं।
AIMIM भी रेस में मौजूद
सपा के अलावा असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने मुस्लिम मतदाताओं की बहुलसंख्यक वाली 7 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं, जिससे अब मुस्लिम वोटर्स मुख्य रुप से तीन भागों में बंट सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो भारतीय जनता पार्टी का पलड़ा भारी हो सकता है।
मुस्लिम वोटर्स को नया विकल्प
उत्तर प्रदेश में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाली समाजवादी पार्टी की एंट्री झारखंड के मुस्लिम वोटरों में एक नया विकल्प प्रस्तुत कर सकती है। झारखंड में सपा अपनी छवि को अल्पसंख्यकों की हितैषी पार्टी के रूप में पेश कर सकती है और उन मतदाताओं को आकर्षित कर सकती है जो कांग्रेस या जेएमएम से निराश हैं।
भाजपा से नाराजगी का मिल सकता है फायदा
इसके अलावा सपा उन मुस्लिम वोटरों को लुभाने का प्रयास करेगी जो भाजपा को रोकना चाहते हैं, लेकिन अन्य पार्टियों के गठबंधन या रणनीतियों से खुश नहीं हैं। इससे कांग्रेस और जेएमएम को अपने वोट बैंक को बनाए रखने में अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
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Published : 5 November 2024, 6:57 PM IST
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