इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह का आयोजन, शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक रहे मुख्य अतिथि

डीएन ब्यूरो

मध्य प्रदेश के अरकंटक में स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की तीसरा दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने दीक्षांत समारोह का उद्घाटन किया। डाइनामाइट न्यूज की रिपोर्ट

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते कुलपति
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते कुलपति


भोपाल: मध्य प्रदेश के अमरकंटक में स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की तीसरा दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बतौर मुख्य अतिथि दीक्षांत समारोह का उद्घाटन कर छात्रों को संबोधित किया। प्रो. डी.पी. सिंह, अध्यक्ष विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली इस मौके पर कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने भी छात्रों को संबोधित किया।  

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना का उद्देश्य जनजातीय विद्यार्थियों को उच्चशिक्षा के क्षेत्र में अवसर प्रदान कर देश के विकास से जोड़ना और उनकी कला और संस्कृति का संरक्षण एवं सवंर्धन करना है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के लिये गौरव का दिन होता है। यह दिन जीवन एवं कर्मपथ पर आगे बढ़ने का प्रस्थान बिंदु होता है।

इस मौके पर शिक्षा मंत्री ने विश्वविद्यालय में चिकित्सालय एवं चिकित्सा विज्ञान केंद्र संकाय से सम्बद्ध नवाचर एवं रोजगारपरक शिक्षा के अवसरों की वृद्धि के लिये भी कई अहम घोषणाएं की। 

मुख्य अतिथि रमेश पोखरियाल निशंक ने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी के नेतृत्व में अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के साथ ही तेजी से आगे बढ़ रहा है। 

विशिष्ठ अतिथि प्रो. डीपी सिंह ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण का कार्य होता है। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि जिन संकल्पों के साथ इस विश्विद्यालय की स्थापना की गई थी, वह आज पूरी हो रही है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि 2007 में स्थापित यह विश्वविद्यालय ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान एवं सामाजाकि सांस्कृतिक क्षेत्र में अपने योग्य शिक्षकों और कर्मचारियों व ऊर्जावान विद्यार्थियों के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सत्र पर विशिष्ठ पहचान बना चुका है। यहां आने वाले 72 फीसदी छात्र समाज के कमजोर वर्ग से आते हैं। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले छात्रों, उनके माता-पिता और अभिभावकों को भी बधाई और शुकामनाएं दी।

विश्वविद्यालय द्वारा अब तक 209 छात्रों को स्वर्ण पदक दिये जा चुके हैं। वर्ष 2020 के लिये स्नातक स्तर पर 27 और स्नातकोत्तर स्तर पर 29 स्वर्ण पदक दिये गये। इसके साथ ही अब तक कुल 3582 छात्र विश्वविद्यालय से दीक्षा ले चुके हैं। तीसरे दीक्षांत समारोह के मौके पर दीक्षांत स्मारिका एवं पुसितक का भी विमोचन किया गया।









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