दक्षिण कोरिया का रूस और चीन पर हवाई सीमा के उल्‍लंघन आरोप, दोनों देशों ने नकारा

डीएन ब्यूरो

चीन ने दावा किया है कि जापान की समुद्री सीमा के पास संयुक्त गश्त के दौरान रूसी और चीनी सैन्य विमानों ने अन्य देशों के हवाई क्षेत्र का कभी उल्लंघन नहीं किया। जबकि दक्षिण कोरिया ने अपनी सीमा का उल्‍लंघन का अरोप दोनों देशों पर लगाया है। डाइनामाइट न्‍यूज पर पढ़ें पूरी खबर..

रूसी और चीनी विमान
रूसी और चीनी विमान

बीजिंग: चीन ने दावा किया है कि जापान की समुद्री सीमा के पास संयुक्त गश्त के दौरान रूसी और चीनी सैन्य विमानों ने अन्य देशों के हवाई क्षेत्र का कभी उल्लंघन नहीं किया। चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता वू कियान ने बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी।

रूस और चीन दोनों देशाें ने 23 जुलाई को एशिया प्रशांत क्षेत्र में लंबी दूरी की मारक क्षमता वाले विमान से पहला संयुक्त गश्त अभियान शुरू किया। दक्षिण कोरिया ने रूस पर आरोप लगाया किया उसने जापान के समुद्र में हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है।प्रवक्ता ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर चीन के श्वेत पत्र की प्रस्तुति के दौरान कहा, “गश्त के दौरान रूस और चीन ने अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का पालन किया है और किसी अन्य देश की हवाई सीमा क्षेत्र का उल्लंघन नहीं किया है।”

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उन्होंने जोर देकर कहा कि गश्त दोनों देशों के संयुक्त युद्धाभ्यास की वार्षिक योजना का हिस्सा था और इसमें तीसरे देश के खिलाफ निर्देशित नहीं किया गया था। 

बांये रूसी राष्‍ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन राष्ट्रपति शी जिनपिंग


दक्षिण कोरिया के संयुक्त चीफ आफ स्टाफ ने दावा किया था कि रूस के ए -50 विमान ने जापान के समुद्री क्षेत्र को दो बार पार कर दक्षिण कोरिया के हवाई क्षेत्र में घुसकर हवाई सीमा का उल्लंघन किया और दक्षिण काेरियाई एफ- 6 लड़ाकू विमान ने जवाबी कार्रवाई में गोली चलाकर चेतावनी दी। 

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रूस के रक्षा मंत्री ने पहले ही दक्षिण कोरिया के दावों का खंडन किया कि टीयू -95एमएस ने दक्षिण कोरियाई हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया था और उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि दक्षिण कोरियाई लड़ाकों ने गैर-पेशेवर युद्धाभ्यास किया था और अपनी सुरक्षा को खतरे में देखते हुए रूसी विमानों पर गोली चलायी थी।

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चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हु चुनयिंग ने बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह दक्षिण कोरिया का हवाई क्षेत्र नहीं था और सभी को वहां उड़ान भरने की स्वतंत्रता है।

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