राम मंदिर मामला: सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में नए बदलाव से मुस्लिम पक्षकार नाखुश

डीएन ब्यूरो

उच्चतम न्यायालय में राम मंदिर की सुनवाई में एक नया ट्विस्‍ट आ गया है। जिसके बाद सुनवाई में शामिल मुस्लिम पक्षकारों ने बदलाव का विरोध किया है। सुनवाई की प्रक्रिया में क्‍या हुए बदलाव, डाइनामाइट न्‍यूज़ पर पढ़ें पूरी खबर..

बांये सुप्रीम कोर्ट और दायें अयोध्‍या में विराजमान राम लला
बांये सुप्रीम कोर्ट और दायें अयोध्‍या में विराजमान राम लला

नई दिल्‍ली: राम मंदिर मामले में शुक्रवार को भी सुनवाई हुई। जिसको लेकर मुस्लिम पक्षकारों के वकील ने आपत्ति भी जताई। उन्‍होंने कहा कि वह सप्‍ताह में पांच दिन सुनवाई होने पर न्‍यायालय की मदद करने में सक्षम नहीं होंगे।

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सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से वकील राजीव धवन ने अदालत से कहा कि यह सिर्फ एक हफ्ते का मामला नहीं है, बल्कि लंबे समय तक चलने वाला केस है। इस तरह के केस में अनुवाद के दस्‍तावेज पढ़ने पढ़ते हैं जिसके बाद मामले की तैयारी करनी पड़ती है। साथ ही अन्‍य दूसरे मामलों की भी सुनवाई होने के कारण उनकी भी तैयारी करनी पड़ती हैं।

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उन्‍होंने कहा कि यह निर्णय अमानवीय है और इससे अदालत को कोई मदद नहीं मिलेगी। साथ ही मुझ पर मुकदमा छोड़ने का दबाव भी बढ़ेगा। उनकी इस बात पर न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने कहा, हमने आपकी चिंताओं को दर्ज कर लिया है, हम आपको जल्द जानकारी देंगे।

ऐसी स्थिति में यह मामला सप्‍ताह में पांच दिन सुना जाएगा। यानि कि सोमवार को ईद है इसलिए सुप्रीम कोर्ट बंद रहेगा, ऐसे में 13 अगस्त से लेकर 16 अगस्त तक मामला सुना जाएगा।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड, न्यायमूर्ति एसए बोबडे, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर की संविधान पीठ कर रही है। 

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गौरतलब है कि आम तौर पर सोमवार और शुक्रवार को नये मामलों की सुनवाई होती है। वहीं उच्‍चतम अदालत ने भी इससे पहले राम मंदिर मामले की सुनवाई मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को करने का निर्णय लिया था, लेकिन कल की सुनवाई के दौरान उसने इसे शुक्रवार और सोमवार को भी जारी रखने का निर्णय लिया गया था।

मामले की प्राथमिकता के साथ होगी सुनवाई

गुरुवार को संविधान पीठ ने कहा कि मामले की रोजाना सुनवाई होगी। संविधान पीठ इस मामले को प्राथमिकता में रख रही है। न्यायाधीशों को मुकदमे पर अपना ध्यान केंद्रित रखना होगा, क्योंकि इसका रिकॉर्ड 20,000 पृष्ठों में दर्ज है। हमारा मानना है कि इससे दोनों पक्षों के वकीलों को अपनी दलीलें पेश करने का वक्त मिलेगा और जल्द ही इस पर फैसला आ सकेगा।

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