महराजगंज: जिला सूचना विभाग की दुर्दशा से सरकार भी बेखबर, भगवान भरोसे सरकारी नीतियां

डीएन संवाददाता

सरकारी योजनाओं और नीतियों को प्रचार-प्रसार कर जन-जन तक पहुचांने का जिम्मा थामने वाले जिले का सूचना विभाग की दुर्दशा जहां प्रशासन की नाकामी को दर्शाती है वहीं सरकार की मंशा पर भी बड़े सवाल खड़ा करती है। महराजगंज के सूचना विभाग से संबंधित डाइनामाइट न्यूज़ की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट..

जिला सूचना केन्द्र महराजगंज
जिला सूचना केन्द्र महराजगंज

महराजगंज: सरकारी उदासीनता के कारण जिले में जन-जन तक सूचना पहुंचाने वाला सूचना विभाग आज खुद अपने वजूद को तरस रहा है। आलम यह है कि अब सूचना विभाग की किसी को खबर तक नहीं है। जबकि एक समय ऐसा था, जब सूचना विभाग का समूचा परिसर राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र हुआ करता था और यहां लोगों की सबसे ज्यादा चहल-पहल देखी जाती थी। अखबर पढ़ने से लेकर जिले समेत देश-विदेश की खबरों को जानने के लिये लोगों का यहां जमावड़ा लगा रहता था। 

हर जिले का सूचना विभाग शासन की नीतियों को जन-जन तक पंहुचाने का प्रयास करता है। सूचना विभाग के जरिये ही सरकार अपनी नीतियों और योजनाओं को मीडिया व आम जनता तक पहुंचाती है, ऐसे में जब सूचना विभाग ही उपेक्षित हो जाये तो इसके दुष्परिणों का अंदाजा आसाना से लगाया जा सकता है। 

 

 

सूना पड़ा कार्यालय

जिले का सूचना विभाग पिछले कुछ वर्षों से नेतृत्व विहीन चल रहा है। सूचना अधिकारी के रूप में प्रभाकर तिवारी के स्थानांतरण के बाद से यह पद खाली चल रहा है। प्रभाकर तिवारी के तबादले के कुछ दिनों बाद तक सहायक सूचना अधिकारी रहे नजमुल हसन ने इस विभाग में जान डालने का काफी प्रयास किया लेकिन उनकी सेवानिवृत के बाद यह कार्यालय सूना पड़ गया।

वाहन तक नसीब नही

जिले समेत सरकार की योजनाओं और नीतियों के प्रचार-प्रसार करने वाला यह विभाग कई तरह के अभावों से जूझ रहा है। बीएल मौर्या के जिला सूचना अधिकारी रहते विभाग के पास एक चार पहिया वाहन टाटा सूमो था, लेकिन अब  विभाग के पास कोई वाहन नहीं है। अब तो यह विभाग अधिकारी के साथ-साथ वाहन विहीन भी चल रहा है।

क्या है वर्तमान दशा?

जिला सूचना अधिकारी रहे प्रभाकर तिवारी के स्थान्तरण के बाद से शासन ने इस पद पर किसी की तैनाती नहीं की। वर्तमान में गोरखपुर जिले के सूचना अधिकारी प्रशांत श्रीवास्तव इस कार्य को अतिरिक्त प्रभार के रूप में देख रहे है। 

कैसे होगा योजनाओं का प्रचार-प्रसार?

सरकार जनहित की योजनायें बनाती रहती है, लेकिन भगवान भरोसे चल रहे इस कार्यालय के ज़रिये उनका प्रचार-प्रसार हो सकेगा, इस पर सभी को संदेह है। 

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