खुलासाः भारतीय बच्चों के शरीर में सीसे की मात्रा कहीं अधिक, यह बीमारी लील रही जिंदगी

डीएन ब्यूरो

भारतीय बच्चों को लेकर ऑस्ट्रेलिया के मौकक्वेरी विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें भारतीय बच्चों में सीसे की मात्रा अत्यधिक पाई गई है। डाइनामाइट न्यूज़ की रिपोर्ट में पढ़ें, बच्चों के लिए यह कैसे है खतरा, कहीं आप अपने बच्चे में तो नहीं देख रहे ये लक्षण..

कुपोषण का शिकार हो रहे बच्चे (फाइल फोटो)
कुपोषण का शिकार हो रहे बच्चे (फाइल फोटो)

मेलबर्नः भारत में एक तरफ जहां कुपोषण कई राज्यों में बच्चों के लिए एक बड़ी समस्या बना हुआ है वहीं अब एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में बच्चों के खून में सीसे की अत्यधिक मात्रा से उनकी बौद्धिक क्षमता को बहुत ही नुकसान पहुंच रहा है। इससे ऐसे बच्चों में दूसरी बीमारियों का खतरा कहीं अधिक बढ़ रहा है।   

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कटे-सडे़ फल स्वास्थ्य के लिए घातक 

 

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डाइनामाइट न्यूज़ की रिपोर्ट में पढ़ें, क्या है बच्चों के खून में सीसे की अत्यधिक मात्रा वाला यह पूरा मामला  

1.ऑस्ट्रेलिया में मैकक्वेरी विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं के भारतीय बच्चों पर किये गये एक विशेष अध्ययन में एक बड़ी चौंकाने वाली बात सामने आई है जो भारतीय बच्चों के लिए बेहद ही खतरनाक साबित हो सकती है।

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2. रिपोर्ट में अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि भारतीयों के खून में सीसे का स्तर दूसरे देशों के मुकाबले कहीं ज्यादा अधिक पाया है। भारत पर मौकक्वेरी विश्वविद्यालय द्वारा किया गया यह पहला बड़ा विशलेषण है। 

    

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स्कूल में भोजन करते बच्चे (फाइल फोटो)

 

3. इस शोध के अनुसार इससे बच्चों में बीमारी का खतरा कहीं अधिक बढ़ने की संभावना है। वहीं बच्चों में बौद्धिक अक्षमता के उपायों पर भी इससे नकारात्मक असर पड़ेगा।

4. इस शोध में मैक्कवेरी विश्वविद्यालय के ब्रेट एरिक्सन ने पाया कि भारत में बच्चों के खून में सीसे के मिश्रण का स्तर लगभग 7 माइक्रोग्राम प्रति डेसीलीटर है। जो कि बच्चों के लिए बेहद ही घातक सिद्ध हो सकता है।    

 

 

गलत पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए घातक

 

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5. अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक भारतीय बच्चों  के खून में सीसे के उच्च स्तर में इसलिए वृद्धि अधिक हो रही है क्योंकि इसके लिए उनकी बैटरी गलन क्रिया जिम्मेदार है। यहीं नहीं हमारे देश में बैटरी रिसाइकिल की प्रक्रिया की व्यवस्था ठीक नहीं है।

6. यह इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि बच्चे आयुर्वेदिक औषधि, आईलाइनर, नूडल्स और मसाले सहित अन्य पदार्थों का ज्यादा सेवन कर रहे हैं इससे उनके खून में सीसे का स्तर बढ़ रहा है।
 

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