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गोरखपुर: सात दिसंबर 2021, वह तारीख थी, जब गोरखपुर के खाद कारखाने को नये सिरे से शुरु किया। उस दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने काफी भव्य आय़ोजन में इसका शुभारंभ तो कर दिया लेकिन हैरानी की बात यह है कि उद्घाटन के 107 दिन बाद भी यहां पर यूरिया खाद का उत्पादन शुरु ही नहीं हो सका।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के मुताबिक इससे भी बढ़कर हैरान करने वाली बात यह है कि 26 मार्च को किसी तरह जाकर उत्पादन तो शुरु हुआ लेकिन 24 घंटे भी यह कारखाना ठीक से यूरिया का उत्पादन नहीं कर पाया।

अब तकनीकी खामियों को दूर कर दोबारा उत्पादन शुरु करने में कारखाने के लोग जुटे हैं। बताया जा रहा है कि रविवार को पंप और वाल्व में खराबी आ जाने से उत्पादन बंद करना पड़ा।
यह कारखाना हिन्दुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (HURL) का है। खाद कारखाने का प्रबंधन अमेरिका और जापान जैसे विकसित देशों के इंजीनियरों से संपर्क स्थापित कर खामियों को ठीक कराने में जुटे हैं। सवाल यह है कि जब उत्पादन ही समय से शुरु नहीं हो सका तो क्या दिसंबर में आनन-फानन में इसके उद्घाटन की आवश्यकता थी? क्या उद्घाटन से पहले नियमों के मुताबिक निर्धारित अवधि और निर्धारित मात्रा में ट्रायल रन हुआ? क्या इतने दिनों तक बिना उत्पादन कारखाने को संचालित करने की लागत के वहन की जिम्मेदारी किसी अधिकारी पर फिक्स की जायेगी?
कहा जा रहा है कि उद्घाटन के बाद पांच सौ टन यूरिया का उत्पादन किया गया था और इसके बाद अनुरक्षण कार्यों के लिए बंद कर दिया गया तब कहा गया था कि 45 दिन बाद दोबारा उत्पादन शुरु होगा। बड़ा सवाल यह है कि किया उद्घाटन के पहले अनुरक्षण कार्यों को अंजाम नहीं दिया जाना चाहिये था?
Published : 29 March 2022, 1:26 PM IST
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