Diwali 2018: जानिये, दिवाली मनाने से जुड़ी मान्यता और पौराणिक इतिहास..

डीएन ब्यूरो

त्यौहारों का सीजन चल रहा है, नवरात्रि और दशहरे के बाद अब दिवाली की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है। दिवाली मनाने के पीछे वैसे तो कई पौराणिक मान्यतायें है लेकिन दिवाली को दीपोत्सव के तौर पर धूमधाम से देश ही नहीं विदेशों में भी मनाया जाता है। डाइनामाइट न्यूज़ की रिपोर्ट में पढ़ें, दिवाली मनाने से जुड़ी मान्यता

मां लक्ष्मी दिवाली पर बरसायेगी कृपा
मां लक्ष्मी दिवाली पर बरसायेगी कृपा

नई दिल्लीः नवरात्रि और दशहरे के बाद अब दिवाली की तैयारियों में पूरा देश जुटा हुआ है। इस बार दिवाली 7 नवंबर 2018 को भारत समेत देश-विदेश में बडे़ धूमधाम से मनाई जायेगी। दिवाली मनाने के पीछे वैसे तो एक बहुत बड़ा पौराणिक इतिहास है लेकिन कुछ ऐसे ऐतिहासिक तथ्यों के बारे में हम यहां बतायेंगे, जिससे यह पता चलता है कि दिवाली को भारत में हर कोई इतने धूमधाम से किसलिये मनाया जाता है।        

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दिवाली पर दीपों से रोशन होगा घर

 

डाइनामाइट न्यूज़ की रिपोर्ट में पढ़ें दिवाली से जुड़ी मान्यता और पौराणिक इतिहासः

1. दिवाली से जुड़ी पौराणिक मान्यता है कि दिवाली कार्तिक महीने की अमावस्या के दिन मनाई जाती है। इस दिन को काफी चमत्कारिक माना जाता है। इस बार 7 नवंबर 2018 को अमावस्या का दिन पड़ रहा है। इसी दिन बड़े हर्षोल्लास के साथ दिवाली पूरे देशभर में धूमधाम से मनाई जायेगी।

2.एक पौराणिक मान्यता के अनुसार जब श्रेता युग में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम रावण का वध कर चौदह वर्षों का वनवास काटकर अयोध्या नगरी वापस लौटे थे तो अयोध्यावासियों ने इस खुशी में घर में घी के दिये जलाये थे और तब अमावस्या की काली रात भी रोशन हो गई थी। तभी से ही दिवाली को प्रकाशोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है।     

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कार्तिक महीने की अमावस्या में मनाई जाती है दिवाली

 

3. दिवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है। यह त्यौहार सभी त्यौहारों में सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। दीपावली को स्वच्छता व प्रकाश पर्व का भी नाम दिया गया है। यहीं वजह है कि दिवाली के त्यौहार की तैयारियां कई सप्ताह पहले से ही शुरू होने लगती है।

4. दिवाली को लेकर यह भी कथा प्रचलित है कि जब श्रीकृष्ण ने आततायी नरकासुर जसे दुष्ट का वध किया, तब ब्रजवासियों ने अपनी प्रसन्नता दीपों को जलाकर प्रकट की थी।     

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दीयों से घर में मिटेगा अंधकार

 

5. दिवाली से जुड़ी एक और पौराणिक मान्यता के अनुसार एक बार जब राक्षसों ने देवलोक में अति मचा दी थी तो तब मां देवी ने महाकाली का रूप धारण कर इन सभी का वध कर दिया। इसके बाद भी जब मां काली का क्रोध कम नहीं हुआ तो तब भगवान शिव स्वयं उनके चरणों में लेट गये। भगवान शिव के शरीर के स्पर्श मात्र से ही देवी महाकाली का क्रोध समाप्त हो गया। इसी पौराणिक मान्यता को मानते हुए हर सला दिवाली में मां काली के शांत रूप लक्ष्मी की पूजा की जाती है। दिवाली के दिन ही रात में मां काली के रौद्र रूप की भी पूजा का विधान है।  

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