Deoria News: करोड़ों की ठगी करने वाले 'सिपाही बाबा' का भंडाफोड़, देखिए कैसा देता है ठगी को अंजाम
लखनऊ एसटीएफ ने टावर लगाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पढ़िए डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट

देवरिया: लखनऊ एसटीएफ ने मोबाइल और वाई-फाई टावर लगाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। गिरोह के सरगना पदुमनाथ दूबे उर्फ सिपाही बाबा समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। ये सभी आरोपी भोले-भाले लोगों को नौकरी, एडवांस भुगतान और अन्य सुविधाओं का झांसा देकर ठगते थे।
15 सालों से चला रहा था ठगी का धंधा
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, देवरिया जनपद के गौरीबाजार थाना क्षेत्र के ग्राम तेंदुबारी निवासी पदुमनाथ दूबे पिछले डेढ़ दशक से लखनऊ और आसपास के जिलों में ठगी का धंधा चला रहा था। वह सिपाही बाबा के नाम से मशहूर है। साल 2010 से उसने टावर लगाने के बहाने लोगों से मोटी रकम ऐंठनी शुरू की।
गांव में सामाजिक कार्यों की आड़ में छुपा अपराध
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सिपाही बाबा ठगी की कमाई से अपनी पत्नी को गांव का प्रधान भी बनवा चुका है। 2021 तक उसकी पत्नी इस पद पर रही। सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहने के कारण गांव के लोग उसकी असली सच्चाई नहीं भांप सके। उसने पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य बनने की तैयारी भी शुरू कर दी थी और इसके लिए लाखों रुपये खर्च कर रहा था।
युवाओं को बनाया गिरोह का हिस्सा
गांव और आसपास के युवाओं को अपने गिरोह में शामिल करने के लिए उसने बड़े-बड़े वादे किए। एक युवक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सिपाही बाबा ने एक महिला से नौकरी और टावर लगाने का झांसा देकर रकम ठगी। महिला ने अपने खेत गिरवी रखकर पैसे दिए। यह देखकर युवक ने ठगी का धंधा छोड़ दिया।
आरोपियों को किया गया गिरफ्तार
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एसटीएफ ने पदुमनाथ दूबे उर्फ सिपाही बाबा, सुनील श्रीवास्तव, अजय कुमार सिंह, अतीउल्लाह अंसारी, और गंगेश्वर पांडे उर्फ गोलू को गिरफ्तार किया है। ये सभी ठगी के लिए पीड़ितों को 15-20 लाख रुपये एडवांस देने और हर महीने ₹25,000 की नौकरी और अन्य सुविधाएं देने का वादा करते थे।
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