सवालों के घेरे में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, पीएमकेवीवाई केंद्र संचालकों का दिल्ली में उग्र प्रदर्शन

डीएन ब्यूरो

पीएम मोदी की स्किल डेवलपमेंट योजना के तहत देश भर में शुरू की गयी प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के विभिन्न राज्यों के केन्द्र के संचालकों ने मोदी सरकार के विरोध में दिल्ली के जन्तर-मन्तर पर धरना-प्रदर्शन किया। इन संचालकों का कहना है कि सरकार की उपेक्षा के कारण वे जब खुद ही बेराजगार हो गये हैं तो औरों को अब कैसे रोजगार दे सकते हैं? पूरी खबर..

प्रदर्शन करते पीएमकेवीवाई  सेंटर संचालक
प्रदर्शन करते पीएमकेवीवाई सेंटर संचालक

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम मोदी ने देश के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिये देश में  महत्वाकांक्षी पीएमकेवीवाई (प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना) शुरू की थी, लेकिन सरकार की लापरवाही के कारण अब इस योजना पर कई तरह के सवाल उठने लगे है। शुरूआती दौर ने जिन लोगों ने इस योजना का जिम्मा उठाया अब वे ही लोग इसको लेकर हताश और परेशान है। देश विभिन्न राज्यों में पीएमकेवीआई केंद्रों का संचालन करने वाले केंद्र सरकार के खिलाफ दिल्ली में जुटे जहां उन्होंने जंतर-मंतर पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर अपना दुखड़ा सुनाया।

 

 

लाख रुपये कर्ज लेकर बुरी तरह फंसे

पीएमकेवीआई को लेकर मोदी सरकार के विरोध में जन्तर-मन्तर पर धरना-प्रदर्शनकर रहे विभिन्न केंद्रों के संचालकों का कहना है कि उन्होंने केंद्र के बहकावे में आकर भारी-भरकम कर्ज लेकर युवाओं के लिये प्रशिक्षण सेंटर की शुरुवात की, लेकिन अब आलम यह है कि वे अपना खर्च तक नहीं निकाल पा रहे है। लगभग 20-25 लाख रुपये कर्ज लेकर वे बुरी तरह फंस गये हैं लेकिन सरकार उनकी तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है।

 

 

उग्र आंदोलन की चेतावनी 

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि सरकार ने उनकी उपेक्षा जारी रखी तो वे अपना आंदोलन और उग्र करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने आत्मदाह तक की भी चेतावनी दी है। डाइनामाइट न्यूज से बातचीत में प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार उनकी समस्याएं सुने और उनका समाधान करे।

घाटे में सेंटर

डाइनामाइट न्यूज से बात करते हुए आगरा के सचिन गुप्ता ने बताया कि उत्थान इंडिया फाउंडेशन के नाम से  सेंटर चला रहे थे। लेकिन अब उनका काम नहीं चल पा रहा है, क्योंकि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना को एनएसडीसी कंट्रोल करता है, जिससे लगतार बदलाव होते रहते है। वो अपने सेंटर में बच्चों को ब्यूटीशियन और सिलाई की ट्रेनिंग देते है। उनका सेंटर मार्च 2017 में पास हुआ था, जिसके बाद में उन्हें 100 बच्चों का टारगेट मिला था। लेकिन इसके बाद उन्हें कोई टारगेट नहीं दिया गया। उन्होंने कर्ज लेकर सेंटर शुरू किया लेकिन अब खर्च तक नहीं निकल पा रहा है। बच्चों का टारगेट न मिलने के कारण उनके सेंटर को लगातार घाटा उठाना पड़ रहा है, जबकि सरकार ने सेंटर को टारगेट देने का वादा किया था।

 

 

15 महीने से कोई काम नहीं

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिये राजस्थान के नागौर जिले से आये हुए रतीराम ने बताया कि उनको भी 18 महीने में केवल 3 महीने का काम मिला है, उसके बाद 15 महीने से कोई काम नहीं नही मिला है, जिसके बाद में उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार की अनदेखी के कारण उन्हें भारी वित्तीय घाटा उठाना पड़ा है।

खुद हो गये बेरोजगार

दिल्ली के संतोष कुमार सैनी ने डाइनामाइट न्यूज़ से बात करते हुए बताया कि सरकार के कहने पर वह लोगों को रोजगार देने के लिए आये थे, लेकिन खुद ही बेरोजगार हो गए है। संतोष का सेंटर पिछले 6 महीने से बंद पड़ा हुआ है। उन्होंने सेंटर में ट्रेंड लोगों को भी रखा लेकिन अब उनको सैलरी देने के लिए पैसा नहीं है। उन्होंने कहा कि हम लोग प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट स्किल डेवलपमेंट के तहत काम कर रहे है, लेकिन जब हम लोगों को पैसा नहीं मिलेगा तो हम लोग कैसे आगे बढ़ेंगे?

योजना पर सवाल उठने स्वाभाविक

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना को स्किल डेवलपमेंट योजना के तहत शुरू किया गया था। यह योजना 2015 में नई नेशनल स्किल डेवलपमेंट और इंटरप्रोनरशिप पॉलिसी के तहत लॉन्‍च किया गया था, जिसका लक्ष्‍य देश से गरीबी को दूर करना था। लेकिन जब रोजगार की दीक्षा देने वाले ही बेरोजगार हो जाएं तो इस योजना पर सवाल उठने स्वाभाविक हो जाते है।  

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