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लखनऊ: हज 2025 के लिए इस वर्ष उत्तर प्रदेश से कुल 15,559 यात्री पवित्र यात्रा पर जाएंगे।
डाइनामाइट न्यूज संवादाता के अनुसार, आवेदन की संख्या राज्य के निर्धारित कोटे से कम रहने के कारण सभी पात्र आवेदकों का चयन बिना किसी लॉटरी प्रक्रिया के कर लिया गया है। इनमें लखनऊ से 5,416 और दिल्ली से 8,090 यात्रियों का नाम शामिल है।
शुक्रवार को अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज राज्य मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने हज हाउस का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यात्रा को सुचारु एवं सुरक्षित बनाने के लिए हर स्तर पर सटीक और समयबद्ध व्यवस्था होनी चाहिए।
मरहम कोटे के तहत 46 महिलाओं का अतिरिक्त चयन
इस बार विशेष 'मरहम कोटे' के तहत 46 महिलाओं का अतिरिक्त चयन किया गया है, जो बिना पुरुष अभिभावक (मेहरम) के हज यात्रा करेंगी। यह केंद्र सरकार की नीति के तहत मुस्लिम महिलाओं को आत्मनिर्भरता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्रशिक्षण हेतु 100 प्रशिक्षकों का चयन
हज निदेशक अंकित अग्रवाल ने जानकारी दी कि हज यात्रियों को प्रशिक्षण देने के लिए 75 जिलों से 100 अनुभवी प्रशिक्षकों का चयन किया गया है। ये प्रशिक्षक हज यात्रियों को यात्रा के दौरान नियमों, व्यवहार, सुरक्षा और धार्मिक कृत्यों की जानकारी देंगे।
92 स्टेट हज इंस्पेक्टर होंगे तैनात
सऊदी अरब में हज यात्रियों की सहायता और मार्गदर्शन के लिए 92 स्टेट हज इंस्पेक्टरों का चयन भी पूरा कर लिया गया है। ये अधिकारी मक्का और मदीना में यात्रियों को आवश्यक सेवाएं, मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करेंगे। इसके साथ ही यह भी प्रस्तावित किया गया है कि हज उड़ानों के शुरू होने से एक सप्ताह पूर्व ही इन इंस्पेक्टरों की तैनाती सऊदी अरब में कर दी जाए, ताकि वे पूर्व तैयारियों का जायजा लेकर वहां व्यवस्था को और बेहतर बना सकें।
तैयारी समय से पूरी करने के निर्देश
राज्य मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि हज यात्रियों के **आवास, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाएं और खानपान की व्यवस्थाएं समय से पूर्व सुनिश्चित कर ली जाएं, जिससे किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।
हज क्या है?
हज इस्लाम धर्म के पाँच बुनियादी स्तंभों में से एक है। यह एक धार्मिक यात्रा है, जिसे हर वह मुसलमान जो शारीरिक और आर्थिक रूप से सक्षम हो, जीवन में कम से कम एक बार करना अनिवार्य माना गया है। हज की यह यात्रा इस्लामी कैलेंडर के अंतिम माह 'जिलहिज्जा' में मक्का शरीफ़ में की जाती है।
हज का महत्व
हज का इतिहास पैग़म्बर हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) और उनके बेटे हज़रत इस्माईल (अलैहिस्सलाम) से जुड़ा है। ऐसा माना जाता है कि उन्होंने अल्लाह के हुक्म से काबा शरीफ की तामीर की थी। हज के दौरान की जाने वाली तमाम रस्में—जैसे सफा और मरवा की सई, मीना, अराफात और मुझदलफा में ठहरना और शैतान को पत्थर मारना—इन ऐतिहासिक घटनाओं की याद दिलाती हैं।
हज सिर्फ़ एक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और ईश्वर से जुड़ने का अवसर होता है। इसमें जाति, रंग, भाषा और देश की सीमाएं समाप्त हो जाती हैं। दुनिया के कोने-कोने से आए लोग एक ही तरह का इहराम पहनकर, एक ही उद्देश्य से, एक ही स्थान पर इकट्ठा होते हैं। यह एकता और समर्पण का प्रतीक है।
हज के दौरान की जाने वाली प्रमुख क्रियाएं
• तवाफ: काबा शरीफ के चारों ओर सात बार चक्कर लगाना।
• सई: सफा और मरवा पहाड़ियों के बीच दौड़ना।
• अराफात में ठहराव: इसे हज का मुख्य स्तंभ माना जाता है। यहां दुआ और इबादत की जाती है।
• शैतान को पत्थर मारना: बुराई के ख़िलाफ़ संघर्ष का प्रतीक।
• कुर्बानी देना: हज़रत इब्राहीम की क़ुरबानी की भावना की याद में जानवर की बलि।
Published : 5 April 2025, 5:23 PM IST
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