नवरात्रि में उमड़े भक्त, सुरक्षा कड़ी

डीएन ब्यूरो

चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो गई है। कानपुर के सभी देवी मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। चारों तरफ माता रानी के जयकारे लग रहे थे। शहर के तपेश्वरी देवी मंदिर पर भक्तों ने चार देवियों की पूजा-अर्चना की।

चैत्र नवरात्रि की शुरुआत
चैत्र नवरात्रि की शुरुआत

कानपुर: मंगलवार को चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो गई। कानपुर शहर में मां दुर्गा के हर रूप की पूजा धूमधाम से की जाती है। यहां के प्राचीन मंदिरों में मां बारादेवी, मां बुद्धादेवी, मां वैभव लक्ष्मी, मां तपेश्वरी देवी, मां जंगली देवी और मां कुष्मांडा हैं। इन मंदिरों में सिर्फ कानपुर के भक्तों की ही नहीं, बल्कि दूर-दूर और दूसरे जिलों से भी भक्त दर्शन-पूजन करने के लिए आते हैं।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम
देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी है। इसे देखते हुए कानपुर प्रशासन ने जिले के सभी बड़े मंदिरों की सुरक्षा कड़ी कर दी है। मंदिरों के बाहर बैरिकेटिंग के साथ सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। ताकि मंदिरों में महिलाओं के साथ होने वाली लूटपाट और छेड़खानी को रोका जा सके। शहर के तपेश्वरी देवी मंदिर में भी नवरात्र के एक दिन पहले ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा चुके थे। मंदिर परिसर में महिलाओं और पुरूषों के लिए अलग अलग इंतजाम किए गए। साथ ही मंदिर के बाहर पुलिस कैंप भी लगाया गया है। 

नवरात्रि में हर दिन यहां हजारों भक्त दूर दूर से दर्शन करने आते हैं। माता के दर्शन के बाद अपने बच्चों का मुंडन और कनछेदन भी कराते हैं। मंदिर का जीर्णोद्धार 1960 में कराया गया था। माता तपेश्वरी के साथ यहां चार देवियां कमला, विमला, सरस्वती और लक्ष्मी माता विराजमान हैं।

मां तपेश्वरी देवी 
शहर के बिरहाना रोड स्थित तपेश्वरी मंदिर की मान्यता है कि इस मंदिर में माता सीता ने आकर तप किया था और लवकुश मुंडन और कनछेदन का शुभ कार्य भी यहीं किया गया था। मंदिर के पुजारी राम लखन ने बताया कि माता सीता बिठूर से आकर इस मंदिर में तप किया करती थी। यहां पर एक मठ भी निकला, जिसको माता सीता के नाम से जाना जाता है। 

मां बारा देवी
यह मंदिर पौराणिक और प्राचीनतम मंदिरों में शुमार है। हांलाकि, इस मंदिर का सटीक इतिहास तो कोई बता नहीं पाता, लेकिन कानपुर और आसपास के जिलों में रहने वालों लोगों को मां बारादेवी में अटूट आस्था है। शहर के जिस इलाके (दक्षिणी इलाके) यह मंदिर बना है, उस इलाके का नाम भी बारा देवी है। एएसआई के सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, इस मंदिर में स्थापित मां दुर्गा के स्वरुप की मूर्ति करीब 17 सौ साल पुराना है।

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