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कानपुर: जीएसटी काउंसिल की बैठकों में कपड़े पर चर्चा न होने के चलते कारोबारियों को उम्मीद थी कि उन्हें मुक्त रखा जाएगा लेकिन जून के प्रारम्भ में हुई बैठक में कपड़े को पांच फीसद टैक्स के दायरे में ले लाया गया। कपड़े पर टैक्स लगाने के विरोध में राष्ट्रीय स्तर की बंदी के समर्थन में कानपुर का थोक कपड़ा बाजार भी गुरुवार को बंद रहेगा। शहर में थोक की करीब चार हजार दुकानें हैं जिनमें रोज कई सौ करोड़ का कारोबार होता है। कपड़ा कारोबारी इसी सप्ताह एक बार पहले भी बंदी कर चुके हैं। वैसे ईद को देखते हुए फुटकर व्यापारियों को छूट दी गई है कि वे चाहें तो बंदी में शामिल न हों। दूसरी ओर अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल घंटाघर से जुलूस निकालेगा। अभी कपड़े पर उत्पादन बिंदु पर टैक्स लगता है। इसके बाद किसी भी प्वाइंट पर टैक्स नहीं लगता।
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ट्रैक्स को लेकर नाराज कपड़ा व्यापारियों का कहना है कि वे न टैक्स चुकाएंगे और न जीएसटी में पंजीयन कराएंगे। 11 जून को जीएसटी काउंसिल की बैठक में कोई संशोधन नहीं होने पर कपड़ा व्यापारी गुरुवार को दोबारा बाजार बंद करने जा रहे हैं। बुधवार को बंदी को लेकर कपड़ा बाजार पदाधिकारियों ने चर्चा की। यह भी तय हुआ कि अगर कोई अधिकारी बाजार में आएगा या रास्ते में गांठ पकड़ी गईं तो विरोध किया जाएगा। बाजार में लाउडस्पीकर से बंदी की घोषणा भी की गई। कपड़ा व्यापारी एक जुलाई से अनिश्चितकालीन बंदी पर जा सकते हैं। कानपुर में सबसे ज्यादा माल सूरत से आता है। सूरत के कारोबारियों ने एक जुलाई से अनिश्चितकालीन बंदी की घोषणा कर दी है।
Published : 15 June 2017, 10:54 AM IST
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