लखनऊः मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी ने जताई जहर देने की आशंका

डीएन ब्यूरो

राजधानी लखनऊ में बसपा विधायक मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी ने भाई के इलाज में सरकार और प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही उन्होंने इस मामले में साजिश किए जाने की बात भी कही है।


लखनऊः हाल ही में बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी और उनकी पत्नी को आया हार्ट सुर्खियों में था। अब इस मामले में एक नई बात सामने आ रही है। यहां अंसारी के भाई अफजाल अंसारी ने अस्पताल प्रशासन पर मुख़्तार अंसारी के इलाज में लापरवाही और राजनैतिक षड़यंत्र के तहत जहर देने का आरोप लगाया है। 

मीडिया से बातचीत में अफजाल अंसारी ने कहा कि जब उन्होंने चाय पी। तब वें अचानक से बेहोश हो गए और उनके मुंह से झाग निकलने लगा, उनकी आंखों की पुतली उलट गयी। उन्होंने इस बात पर शक जताया कि उनके साथ साजिश कर उनकी चाय में जहरीला पदार्थ मिलाया गया है। 

उन्होंने कहा कि अगर यह साजिश नहीं और उन्हें जहर नहीं दिया गया, यह हार्ट अटैक ही था। तब फिर पीजीआई में उनके इलाज के लिए जरुरी वक्त क्यों नहीं दिया गया? ऐसी क्या जल्दी थी कि उन्हें 24 घंटे के भीतर फिर से बाँदा जेल भेज दिया गया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा की हार्ट के मरीज का 1 ही दिन में सभी जांचे कैसे पूरी हो गयी और उन्हें जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया?

राजनैतिक षड़यंत्र की जताई आशंका

अफजाल अंसारी ने कहा कि डाक्टरों ने बताया की उन्हें बेड रेस्ट की जरुरत है। उनकी में नसों में कुछ खास ब्लोकेज नहीं है। स्थिति सामान्य है तो फिर कहीं न कहीं यह साजिश है और उन्हें जहर दिया गया है? 

उन्होंने बताया कि उनकी फ़ोन से मुख्यमंत्री से बात हुई थी तो मुख्यमंत्री ने उनके इलाज का भरोसा दिलाया और कार्यालय से अस्पताल प्रशासन को फ़ोन भी गया कि मुख़्तार अंसारी की हालत सीरियस है। उन्हें एडमिट करके इलाज किया जाये। मगर  कुछ बिचौलिए अधिकारी और सरकारी तंत्र ने साठगांठ कर डाक्टरों पर दबाव बनाया, जिससे उन्हें आनन-फानन में PGI से डिस्चार्ज कर वापस बांदा जेल भेज दिया गया।

किया जांच की मांग
अफजाल अंसारी ने कहा कि सत्ता के जो लोग हैं, जिन पर मुकदमें हैं। उन्हें उनके गृह जनपद की जेल में रखा जा रहा है। उन्हें खुला संरक्षण मिल रहा है। मुख़्तार अंसारी को बांदा जेल में क्यों रखा गया है? जब उनका वहां कोई मुकदमा ही नही है? उन्हें लखनऊ रखिये, मऊ में रखिये या आगरा में रखिये। जहाँ उनके खिलाफ मुकदमें हैं। ट्रीटमेंट की फाइलों की जाँच होनी चाहिए और प्रशासन की लापरवाही उजाकर करनी चाहिए।

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