UP Roadways: यूपी रोडवेज ने कई कर्मचारियों को किया निलंबित, जानिये ये बड़ी वजह

डीएन ब्यूरो

यूपी रोडवेड में ई-बसों के संचालन में गड़बड़ी के मामले में कई कर्मचारियों पर गाज गिरी है। कई कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। पढ़िए डाइनामाइट न्यूज़ कि रिपोर्ट

ई-बसों के संचालन में गड़बड़ी (फाइल फोटो)
ई-बसों के संचालन में गड़बड़ी (फाइल फोटो)


कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में ई-बसों के संचालन में गड़बड़ी का मामला अब गंभीर मोड़ पर पहुँच चुका है। शहर की ई-बसों में यात्रियों से किराया लेकर उन्हें टिकट न देने के मामले में ढाई माह बाद फिर से 31 संविदा परिचालकों को निलंबित कर दिया गया है।

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, मुख्य संचालन अधिकारी रजनीश राजपूत ने इन परिचालकों के निलंबन पत्र जारी किए हैं, जिसके बाद अब तक कुल 71 परिचालकों को सेवा से हटा दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद परिचालकों में नाराजगी है और उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से कर्मचारियों के मनोबल पर असर पड़ता है।

लगातार हो रही आय में कमी

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कानपुर शहर में ई-बसों का संचालन कानपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड द्वारा किया जाता है। इन बसों का संचालन रामादेवी स्थित डिपो से किया जाता है। पिछले कुछ महीनों से इन बसों से होने वाली आय में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही थी।

आय में इस कमी को लेकर जांच शुरू की गई और मुख्य संचालन अधिकारी रजनीश राजपूत के नेतृत्व में 15 नवंबर 2024 से अब तक के सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई। इन फुटेज में यह सामने आया कि कई परिचालक यात्रियों से किराया तो ले रहे थे, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दे रहे थे। 

इससे पहले 27 दिसंबर 2024 को 40 परिचालकों पर टिकट न देने का आरोप लगा था। इसके बाद 13 मार्च 2025 को भी 31 और परिचालकों को निलंबित कर दिया गया था। अब फिर से 31 परिचालकों को निलंबित कर दिया गया है, जिससे यह संख्या बढ़कर 71 हो गई है। 

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जांच प्रक्रिया पर सवाल

27 दिसंबर 2024 को 40 परिचालकों के खिलाफ टिकट न देने के आरोप में कार्रवाई की गई थी। इसके बाद इन कर्मचारियों को सेवा से हटा दिया गया था। लेकिन अब तक इन आरोपों की जांच पूरी नहीं हो पाई है।

ढाई माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन जांच प्रक्रिया में कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आ पाया है। इस मामले में एडीएम सिटी और KCTSL के प्रबंध निदेशक ने भी जांच पूरी करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।










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