DN Exclusive बलरामपुर: आज़ादी के सात दशक बाद भी गांवों में अंधेरा, मूल सुविधाओं से वंचित ग्रामीण

डीएन संवाददाता

सरकार और प्रशासन आये दिन गांवों को लेकर बड़ी-बड़ी घोषणाएं करते रहते हैं, लेकिन इन घोषणाओं की जमीनी हकीकत बलरामपुर के कुछ गांवों में जाने से पता चलती है। आजादी के बाद भी ये गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। डाइनामाइट न्यूज़ की खास रिपोर्ट..


बलरामपुर: भारत की आज़ादी के 71 साल हो चुके है लेकिन जिले में आज भी ऐसे कई गांव मौजूद है जहां 7 दशकों के बाद भी सरकार मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने में नाकाम रही है। आजादी के बाद बलरामपुर देहात के मजरा, डिहवा, रंजीतपुर गांव के लोगों ने भी विकास का सपना देखा था, लेकिन प्रशासन की लापरवाही की वजह से उनका सपना आज तक भी पूरा नहीं हो सका है।  

मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर गाँव 

जिले के गांव मजरा, डिहवा, रंजीतपुर अभी भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहें हैं। हाल में ही डाइनामाइट न्यूज़ ने इन गांवों दौरा किया और लोगों से हकीकत जानी। इस दौरान पता चला कि राज्य और केंद्र सरकार मूलभूत सुविधाएं देने के वादे तो कर रहे है लेकिन सुविधाएं ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पा रही है। इन गाँवों के लोग आज भी बिजली, सड़क, शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर जूझ रहे हैं।  

बिजली का सपना

 

ग्रामीणों ने कहा कि गांव में बिजली का सपना तो बस एक सपना ही बन कर रह गया है। गांव के लोगों के लिये बिजली की बात एक दूर की कौड़ी साबित हो रही है। बिजली न होने से गांव के नौनिहालों का भविष्य भी अन्धकारमय होता जा रहा है, क्योंकि बिजली के अभाव में बच्चे रात में पढ़ाई भी नहीं कर पाते हैं।  

विभाग की बड़ी उदासीनता

डाइनामाइट न्यूज़ की पड़ताल के दौरान गांव वालों ने बताया कि कुछ महीने पहले विभाग ने यहाँ पर बिजली के खंभे गिराए थे, जिसके बाद उम्मीद की जगी थी कि शायद गांव में पहली बार बिजली आ जाए। लेकिन ये विभाग का ढुलमुल रवैया ही रहा कि गांव में खंभे आज भी जगह-जगह पड़े हुए हैं।

 

 

अधिकारियों के बड़े बोल

गांव में बिजली की व्यवस्था को लेकर जब विद्युत अधिशाषी अभियंता से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जिले के लगभग 1000 से अधिक गाँवों का विद्युतीकरण किया जा रहा है।  हमारा लक्ष्य है कि हम 2019 तक जिले के सभी गांवों में बिजली पहुंचा देंगे।  
 








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