मासूमों के भविष्य से खेलते विद्यालय, दांव पर देश का भविष्य

डीएन ब्यूरो

एक ओर जहां भाजपा सरकार शिक्षा और विद्यालय की स्थिति सुधारने का दावा करती है, वहीं जिले के तमाम स्कूल सरकार के दावों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। पढ़ें डाइनामाइट न्यूज़ पर पूरी खबर...


अमेठी:  शुक्रवार की सुबह अमेठी में स्कूलों में मासूम बच्चों का भविष्य दांव पर लगा। सरकार भले ही सरकारी स्कूल के बच्चों को कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर सुविधा देने का दम भर रही हो। मगर, इनमें से कई स्कूलों के शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के बजाय उनसे काम करवाते हैं। ऐसे में खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन स्कूलों में किस तरह शिक्षा का बंटाधार किया जा रहा है।

यह भी पढ़ेंः एसएन श्रीवास्तव होंगे दिल्ली के नए पुलिस कमिश्नर, 1 मार्च से संभालेंगे पदभार 
इसका जीता जागता उदाहरण ग्राम सौना के मॉडल विद्यालय में देखा जा सकता है। जहां पर बच्चे शिक्षा ग्रहण करने विद्यालय आते है। लेकिन शिक्षा तो मिलती नहीं, उन्हें सुबह से ही विद्यालय में फावड़ा खुरपी थमा दिया जाता है। फिर ये मासूम स्कूल में बागवानी व निराई - गोड़ाई करते हैं। इस स्कूल में कक्षा 5 तक के बच्चे पढ़ते हैं।

यह भी पढ़ेंः IAS रोहित यादव प्रधान मंत्री कार्यालय में संयुक्त सचिव के रूप में किए गए नियुक्त

मासूम बच्चो से विद्यालय में फावड़े से गुड़ाई, ईंट खुदवाई जैसा कार्य करवाया जाता है। जो सर्वथा अनुचित ही नहीं बल्कि अमानवीय भी है। जब छात्रों से इस बारे बात की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस खुदाई के कार्य में अध्यापिका ने लगाया है। विद्यालय की अध्यापिका ने पहले तो माना किया। लेकिन बाद में अध्यापिका से कैमरे के सामने पूछा गया तो कहने लगी कि विद्यालय में बच्चो से काम करवाना कोई गलत काम नहीं है। मै एक शिक्षक होकर भी इन बच्चों के साथ बराबर काम करती हूँ।













संबंधित समाचार