Uttarakhand: जानिये रामजी वाला हुए मियांवाला का इतिहास, नये नाम पर विवाद और विरोध
उत्तराखंड की धामी सरकार ने हाल ही में राज्य के विभिन्न स्थानों का नाम बदला है लेकिन अब इस फैसले पर अब विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं। पढ़िये डाइनामाइट न्यूज की पूरी रिपोर्ट

देहरादून: उत्तराखंड की धामी सरकार ने हाल ही में राज्य के विभिन्न स्थानों के नाम बदलने का निर्णय लिया है। इनमें देहरादून का ‘मियांवाला’ भी शामिल है, जिसका नाम अब ‘रामजी वाला’ कर दिया गया है।
सरकार का दावा है कि यह कदम जनता की मांग पर उठाया गया है, लेकिन इस फैसले पर अब विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं।
मियांवाला: क्या वास्तव में मुस्लिमों से जुड़ा था यह नाम?
सामान्य तौर पर ‘मियांवाला’ नाम को सुनकर यह आभास होता है कि इसका संबंध मुस्लिम समुदाय से हो सकता है। लेकिन स्थानीय लोगों और इतिहासकारों का दावा है कि इस नाम का मुस्लिमों से कोई संबंध नहीं है।
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इतिहासकारों का दावा
मियांवाला में कई पीढ़ियों से रहने वाले विरेंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि अंग्रेजी शासनकाल के दौरान इस क्षेत्र में रांगड़ राजपूतों की बड़ी संख्या में आमद हुई थी। इन राजपूतों को सम्मानपूर्वक ‘मियां जी’ कहकर बुलाया जाता था, और इसी कारण इस इलाके का नाम ‘मियांवाला’ पड़ा।
चौहान के अनुसार, मियां जाति के लोग केवल देहरादून में ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में भी बसे हुए हैं। इसलिए, मियांवाला नाम का मुस्लिम समुदाय से कोई संबंध नहीं है।
सरकार के फैसले पर विवाद
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उत्तराखंड सरकार द्वारा मियांवाला का नाम बदलने के फैसले को हिंदुत्व की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में भी कई स्थानों के नाम बदले जा रहे हैं, और यह सिलसिला अभी जारी है। हालांकि, स्थानीय जनता के एक वर्ग ने इस बदलाव पर असंतोष व्यक्त किया है।
क्या बैकफुट पर आएगी धामी सरकार?
सूत्रों की मानें तो जनता के विरोध को देखते हुए धामी सरकार इस मुद्दे पर पुनर्विचार कर सकती है। अगर स्थानीय लोगों का दबाव बढ़ता है, तो सरकार अपने फैसले को वापस भी ले सकती है।
सरकार के इस फैसले से जहां कुछ लोग संतुष्ट हैं, वहीं कुछ इसे ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी बताते हुए विरोध कर रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि धामी सरकार अपने इस फैसले पर कायम रहती है या जनता की मांग पर इसे वापस लेती है।