‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ ने कुछ यूं बदली लोगों की तकदीर..

विशाल शुक्ला

26 मई 2014 को भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने देश के गांव-देहात से लेकर शहरी वासिंदों की भलाई के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की। इन सभी योजनाओं का मकसद आम नागरिक समेत गांव-कस्बे, नगर-शहर को आर्थिक-सामाजिक आधार पर सशक्त बनाकर एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण करना है। प्रधानमंत्री द्वारा शुरु की गयी इन सभी योजनाओं में से हम कुछ चुनिंदा योजनाओं की पड़ताल कर रहे हैं, जो डाइनामाइट न्यूज़ टीम की ग्राउंड रिपोर्ट पर आधारित है। हमारा मकसद न केवल इन योजनाओं की 'ज़मीनी नब्ज' टटोलना है, बल्कि सामाजिक-आर्थिक परिवेश में हुए बदलावों को जानना भी है। इसकी पहली कड़ी में हम कर रहे हैं यूपी के कानपुर जिले में ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ की पड़ताल..

बिठूर कस्बे में स्थित पतंजलि की अपनी दुकान में आशीष
बिठूर कस्बे में स्थित पतंजलि की अपनी दुकान में आशीष

एक परिचय: ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’

8 अप्रैल 2015 को मुद्रा बैंक के तहत ‘मुद्रा योजना’ की शुरुआत की गयी। इसकी तीन श्रेणियां है- शिशु, किशोर और तरुण। इससे लाभार्थियों को अपने पैर पर खड़े होने में आर्थिक मदद मिलती है। इसके तहत तीन श्रेणियों- 50 हजार, पांच लाख और दस लाख रुपये तक का ऋण इच्छुक आवेदकों को सरकार बैंकों के माध्यम से देती है। इस योजना का लाभ उठाकर कोई भी इंसान अपने दम पर अपना रोजगार खड़ा कर सकता है।

कानपुर: 'प्रधानमंत्री मुद्रा योजना' की ज़मीनी हकीकत उत्तर प्रदेश में क्या है, इसे जानने के लिए डाइनामाइट न्यूज़ की टीम राज्य के अलग-अलग जिलों में पहुंचकर स्थलीय सत्यापन कर रही है और इसकी पहली सीरिज में हम पहुंचे हैं कानपुर जनपद मुख्यालय से 42 किमी दूर स्थित बिठूर इलाके में। हमारी पहली मुलाक़ात हुई 'दोना-पत्तल' बनाने वाले विनायक राव टोपे से।

 

 

'शिशु ऋण' से बढ़ा विनायक राव टोपे का व्यवसाय

योजना की पड़ताल करते हुए डाइनामाइट न्यूज़ की टीम पहुंची विनायक राव टोपे के आवास पर.. ये क्या, घर पर ही व्यापार! यह सवाल पूछने पर टोपे, गर्व से बताते हैं, वे अपने घर से ही ‘दोना-पत्तल’ का व्यापार करीब 8 महीने से चला रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास पैसों की कमी के कारण ‘दोने’ बनाने की मशीन नही थी, जब उन्होंने इस योजना के बारे में सुना तो लगा कि अब लगा कि शायद उनका कुछ भला होगा। बैंक से सारी जानकारी करने के बाद मैंने, स्टेट बैंक से 'शिशु ऋण' के तहत 50 हज़ार का लोन लिया और मशीन खरीदी। इसके बाद तो व्यवसाय में उछाल आ गया और स्थिति सुधर गयी।

 

 

50 हजार रुपये ने रमेश के हौसले को दिये पंख

इलाके के सुबेदार नगर निवासी रमेश कुमार द्विवेदी केबिल ऑपरेटर हैं। इन्होंने डाइनामाइट न्यूज़ को बताया कि ये केबिल का काम करते हैं। इन्होंने अपना व्यवसाय 2001 में जीरो से शुरू किया। तब से लगातार 16 साल तक बहुत ही कष्ट झेला, उस वक्त तक सरकार की तरफ से सहायता नही मिल पाती थी। व्यापार बढ़ नही पा रहा था। 2015 में इन्होंने मुद्रा योजना के बारे में सुना। इसके बाद भारतीय स्टेट बैंक की बिठूर शाखा से 'शिशु ऋण' के तहत 50 हज़ार का ऋण लिया जिसे अपने व्यवसाय में लगा दिया। रमेश पहले 1 हज़ार कमाते थे, अब 50 हज़ार लोन से, 5 हज़ार कमाने लगे। रमेश के मुताबिक देश का विकास ऐसी ही योजनाओं से हो सकता है।

 

 

'तरुण ऋण' से पुष्कर के व्यवसाय को मिली रफ्तार

कानपुर जिले में बिल्डिंग मेटेरियल का व्यवसाय कर रहे बिठूर के लवकुश नगर निवासी पुष्कर शुक्ल ने बताया कि बिज़नेस तो काफी पुराना है करीब 15 साल हो गए हैं। हाँ, मुद्रा योजना के बारे में सुनकर ऐसा लगा कि अब व्यवसाय में फर्क आएगा। पुष्कर के मुताबिक उनके पास व्यवसाय को बढ़ाने के लिए पर्याप्त पूंजी नही थी। फिर इन्होंने ‘तरुण ऋण’ के तहत 10 लाख का ऋण लेकर व्यवसाय को रफ्तार दे दी। ऐसी योजनाओं से नई राहें खुलती हैं। पुष्कर के अनुभवों के मुताबिक ‘मुद्रा योजना’ एक कल्याणकारी योजना है। जिसके दूरगामी परिणाम निकलते हैं।

 

 

दो लाख के लोन ने बढ़ाया आशीष का मनोबल

मोहम्मदपुर बिठूर निवासी आशीष सिंह पतंजलि आरोग्य शॉप चलाते हैं। 4 साल पहले इन्होंने इसे शुरू किया। बिज़नेस को और विस्तार देने के लिए कुछ पैसों की जरूरत थी, मुद्रा योजना के बारे में जब इन्होंने, लोगों से सुना तो काफी अच्छा लगा। इसके बाद इन्होंने ‘किशोर ऋण’ के तहत करीब 2 लाख का लोन, बैंक से 4 महीने पहले लिया। पहले पूंजी की कमी के चलते स्टॉक पर्याप्त मात्रा में नही ला पाते थे जिससे दिक्कतें होती थीं लेकिन इस योजना का लाभ लेने के बाद हालात बदले गये हैं। अब स्टॉक बढ़ गया है और ग्राहकों को पर्याप्त सामान दे पा रहे हैं। आशीष के मुताबिक, हर छोटे व्यवसायी को इस योजना के बारे में जरूर जानना चाहिए।

 

 

3 लोडर की खरीद से ओम प्रकाश को हुई बिजनेस में आसानी

क्षेत्र के ओम प्रकाश द्विवेदी ने बताया कि उनके पास एचपी गैस की एजेंसी है। काफी दिनों से एजेंसी चल रही है, हमें डिलीवरी की गाड़ियों की आवश्यकता थी। ‘मुद्रा योजना’ के बारे के जानने के बाद उन्होंने 1 साल पहले भारतीय स्टेट बैंक से ‘किशोर ऋण’ के तहत 4 लाख का लोन लिया। इस लोन से हमारे व्यवसाय में परिवर्तन आ गया। इन्होंने डिलीवरी के लिए 3 लोडर खरीदे, जिससे बिज़नेस में काफी सुविधा होने लगी। साथ ही 7 हज़ार कनेक्शन भी बढ़ गए। उन्होंने कहा ये योजना छोटे उद्यमियों के लिए काफी लाभकारी है।

 

20 लाख तक हो ऋण सीमा

भारतीय स्टेट बैंक के बिठूर शाखा के प्रबंधक शशांक मिश्रा ने डाइनामाइट न्यूज़ को बताया कि हमारी शाखा से, डेढ़ साल में 15 लोगों ने 'मुद्रा योजना' का लाभ उठाया है। इसके तहत इस माह में 30 लाख का ऋण वितरित किया है। उन्होंने बताया कि ये ग्रामीण इलाका है और यहां छोटे-मध्यम व्यवसायी है। यहां अधिकतम लोगों ने ‘शिशु ऋण’ लिया है। जिससे काफी अच्छे परिणाम आ रहे हैँ। शशांक ने कहा सरकार को इसमें सब्सिडी का लाभ और देना चाहिए तथा ऋण सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख कर देनी चाहिये जिससे लोगों को और अधिक लाभ मिल सके।

(डाइनामाइट न्यूज़ के ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)






संबंधित समाचार