New Education Policy 2020: जानिये, नई शिक्षा नीति से जुड़ा हर महत्वपूर्ण तथ्य और सरकार का उद्देश्य

डीएन ब्यूरो

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बुधवार को देश में नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी। जानिये, नई शिक्षा नीति से जुड़े हर महत्वपूर्ण तथ्य और इसको लेकर आने के पीछे सरकार के उद्देश्य। विस्तृत रिपोर्ट..

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

नई दिल्ली: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बुधवार को देश में नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है। इसे कैबिनेट से भी मंजूरी मिल गयी है। देश में मौजूदा शिक्षा नीति को अंतिम बार 1992 में अपडेट किया गया था। नई शिक्षा नीति केंद्र को मौजूदा मोदी सरकार ने 2014 के लोक सभा चुनाव में अपने घोषणा पत्र में भी शामिल किया था।

नई शिक्षा नीति का उद्देश्य

इस नीति का उद्देश्य स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा को तकनीकी शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षाओं को दायरे में लाना है। छात्र को बचपन से ही उसके हुनर और दिलचस्पी के हिसाब शिक्षा देना है। ताकि छात्रों को पढ़ाई के साथ साथ किसी लाइफ स्‍क‍िल से सीधा जोड़ा जा सके।

जीडीपी का 6 फीसदी हिस्सा शिक्षा पर खर्च

अब देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का कुल 6 फीसदी हिस्सा शिक्षा पर खर्च किया जायेगा। फिलहाल भारत की जीडीपी का 4.43 फीसदी हिस्सा शिक्षा पर खर्च होता है। इससे शिक्षा को और अव्वल बनाया जायेगा।

देश में 100 फीसदी एनरोलमेंट

सरकार ने वर्ष 2030 तक इस शिक्षा नीति को देश के हर हिस्से में पूरी तरह लागू करने और हर बच्चे के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए एनरोलमेंट को 100 फीसदी तक लाने का लक्ष्य है। ताकि स्कूली शिक्षा के निकलने के बाद हर बच्चे के पास कुछ लाइफ स्किल भी हो सके।

स्कूली पाठ्यक्रम

अभी तक हमारे देश में स्कूली पाठ्यक्रम 10+2 के हिसाब से चलता है लेकिन अब नई शिक्षा नीति में इसे खत्म कर 5+ 3+ 3+ 4 के फार्मेट को मंजूरी दी गयी है। जिसका मतलब प्राइमरी से दूसरी कक्षा तक एक हिस्सा, फिर तीसरी से पांचवीं तक दूसरा हिस्सा, छठी से आठवीं तक तीसरा हिस्सा और नौंवी से 12 तक आखिरी हिस्सा होगा।  

फाउंडेशन स्टेज

नई शिक्षा नीती (एनइपी) में पहला स्टेज फाउंडेशन स्टेज होगा। इसके तहत पहले तीन साल बच्चे आंगनबाड़ी में प्री-स्कूलिंग शिक्षा लेंगे। उसके बाद अगले दो साल कक्षा एक एवं दो ममें पढ़ेंगे। इन पांच सालों की पढ़ाई के लिए एक नया पाठ्यक्रम होगा। इनमें एक्टिविटी आधारित शिक्षण पर ध्यान दिया जायेगा। इसमें तीन से आठ साल तक की आयु के बच्चे कवर होंगे। इस प्रकार पढ़ाई के पहले पांच साल का चरण पूरा होगा।

प्रीप्रेटरी स्टेज

दूसरा प्रीप्रेटरी स्टेज होगा। इसमें कक्षा तीन से पांच तक की पढ़ाई होगी। इसमें बच्चों को विज्ञान, गणित, कला आदि की पढ़ाई कराई जाएगी। आठ से 11 साल तक की उम्र के बच्चों को इसमें शामिल किया जायेगा।

मिडिल स्टेज

इसमें कक्षा 6-8 की कक्षाओं की पढ़ाई होगी तथा 11-14 साल की उम्र के बच्चों को कवर किया जाएगा। इन कक्षाओं में विषय आधारित पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। कक्षा छह से ही कौशल विकास कोर्स भी शुरू हो जाएंगे।

सेकेंडरी स्टेज

मिडिल स्टेज पूरा होने के बाद बच्चे सेकेंडरी स्टेज में प्रवेश करेंगे। जिसमें कक्षा 9 से 12 की पढ़ाई होगी। इसमें भी दो चरणों में होंगे। विषयों का गहन अध्ययन कराया जाएगा। छात्रों को मनपसंद के विषयों को चुनने की आजादी मिलेगी।

तीन बार बोर्ड परीक्षा

बोर्ड एग्जाम को भी अलग-अलग हिस्सों में बांटा जाएगा। छात्रों पर बोझ कम करने के लिये बोर्ड तीन बार भी परीक्षा करा सकता है। इसके अलावा अब बच्चों के रिपोर्ट कार्ड में लाइफ स्किल्स को जोड़ा जाएगा। 

हायर एजूकेशन में लचीलापन

मिडिल स्टेज के बाद हायर एजूकेशन के लिये पढ़ाई बीच में छूटने के बाद भी छात्रों के लिये शिक्षा का मार्ग हमेशा खुला रहा और पढी गयी कक्षाओं का भी पूरा फायदा मिलेगा। अब अगर किसी कारण से पढ़ाई बीच सेमेस्टर में छूट जाती है तो इसे मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम के तहत लाभ मिलेगा। एक साल पढ़ाई के लिये सर्टिफिकेट, दो साल के लिये डिप्लोमा मिलेगा और तीन या चार साल के बाद डिग्री दी जाएगी।

कॉमन एंट्रेंस परीक्षा का जिम्मा एटीए को

एनईपी के तहत देश भर के विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को अब अतिरिक्त चार्ज दिया जाएगा। जिसमें वह हायर एजुकेशन के लिए आम यानी कॉमन एंट्रेंस परीक्षा का आयोजन कर सकता है। 

संसद से होगा पारित

कैबिनट से मंजूरी मिलने के बाद नई शिक्षा नीति को सराकर द्वारा संसद में पारित कराया जायेगा, जिसके बाद यह लागू हो जायेगी। केंद्र के आदेश के बाद राज्य सरकारें भी वैधानिक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद इस नीति को लागू कर सकेंगी।  
 













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