DN Exclusive: अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के बावजूद भी योग महर्षि पतंजलि को भूल गयी सरकार

डीएन संवाददाता

भारत की पहल पर पूरे विश्व में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। भारत समेत दुनिया में जब भी योग की बात होती है तो महायोगी महर्षि पतंजलि का नाम सबसे पहले लिया जाता है, लेकिन सरकारी उदासीनता के कारण योग ऋषि पतंजलि की जन्मभूमि आज भी पहचान की मोहताज बनी हुई है। एक्सक्लूसिव रिपोर्ट..

महायोगी महर्षि पतंजलि की जन्मभूमि
महायोगी महर्षि पतंजलि की जन्मभूमि

गोंडा: दुनिया भर में योग को लेकर जाने वाले देश के पीएम मोदी को संभवत यह बात मालूम ही नहीं है कि भारत को योग का वरदान देने महायोगी महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली आज भी विकास को तरस रही हैl लंबे समय से योग को अपनाने वाले सीएम योगी के राज्य में महर्षि पतंजलि की जन्मभूमि का उपेक्षित होना किसी को रास नहीं आता है। यहीं नहीं, पतंजिल के नाम का सर्वाधिक उपयोग करने वाले योग गुरू बाबा रामदेव द्वारा भी महर्षि पतंजलि के जन्मस्थली की सुध न लेना कई सवाल खड़े करता है।

 

विकास के सपने देखती महर्षि की जन्मस्थली 

यूपी के देवी पाटन मंडल मुख्यालय गोण्डा जिले के वजीरगंज कोडर गांव में स्थित महायोगी महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली आज भी विकास को तरस रही हैl योगी सरकार में महायोगी की जन्मस्थली विकास के सपने संजोए हुई है, लेकिन सरकार है कि उस तरफ देखती ही नहीं।

महर्षि पतंजलि न्यास के अध्यक्ष स्वामी भगवदाचार्य

 

संयुक्त राष्ट्र, यूनेस्को ने गोनर्द को माना जन्मस्थल

महर्षि पतंजलि न्यास के अध्यक्ष स्वामी भगवदाचार्य ने डाइनामाइट न्यूज को बताया कि भले ही अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर केन्द्र, राज्य सरकार व पतंजलि योगपीठ जगह जगह प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से योग के लिये प्रयासरत हो, लेकिन योग प्रणेता महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली की बदहाली पर अभी तक किसी ने ध्यान नहीं दिया हैl संयुक्त राष्ट्र, यूनेस्को और भारत सरकार ने महायोगी पतंजलि का जन्मस्थान गोण्डा, जो कि पूर्व में गोनर्द के नाम से जाना जाता था, को माना हैl  

योग का सम्मान करने वालों ने नहीं ली सुध

स्वामी भगवदाचार्य ने कहा कि पतंजलि के जन्मस्थान के जीर्णोंद्धार के लिये उन्होंने कई बार सरकार से अनुरोध किया गया, परंतु योग का सम्मान करने वाले मोदी और योगी की सरकारों में यहाँ की सुध तक नहीं ली। इसी प्रकार योगगुरू स्वामी रामदेव की पतंजलि योगपीठ ने भी कोडर गांव की ओर दृष्टि तक नही डाली हैl  पिछली सरकारों के नुमाइंदों ने कोडर गांव का दौरा कर सिर्फ घोषणाओं की खानापूर्ति कीl 

जनसुविधाओं का भारी अभाव 

हालाँकि पिछली अखिलेश सरकार ने जिले के कर्नलगंज तहसील क्षेत्र में महर्षि पतंजलि सूचना प्रौद्योगिकी एवं पॉलीटेक्निक कॉलेज का निर्माण शुरू करायाl  इसके अतिरिक्त जिलाधिकारी प्रभांशु कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में नगर में महर्षि पतंजलि स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स में 21 जून को सभी वर्गों को योग कराया जायेगा, लेकिन महर्षि की जन्मस्थली कोडर का कोई विकास नही हो सका।  उन्होंने बताया कि कोडर गांव मे स्थित झील की हालत बदतर हैl  यहाँ दूर दराज से आने वाले आगंतुकों के लिये कोई आश्रम या धर्मशाला, आदि की कोई सुविधा नही हैl शुद्ध पेयजल, विद्युत, खानपान व अन्य तमाम संसाधनों के नामों निशान तक नही है।  इस संबन्ध में केन्द्र व राज्य सरकारों को पत्र के माध्यम से कई बार न्यास समिति ने अनुरोध किया है, लेकिन कोई फायदा नहीं मिला।

कोडर झील के किनारे योग शिविर

बहरहाल स्थानीय संसाधनों को एकत्र कर स्वामी भगवदाचार्य के नेतृत्व में प्रतिवर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कोडर झील के किनारे योग शिविर का कार्यक्रम आयोजित कर संगोष्ठी करायी जाती है। 

महर्षि पतंजलि का जन्म और कर्मस्थली 

मान्यताओं के अनुसार विक्रम संवत दो हजार वर्ष पूर्व श्रावण मास की शुक्ल पंचमी को महर्षि पतंजलि ने गोनर्द की पावन धरती पर जन्म लियाl  उनकी माता का नाम गोणिका थाl वे व्याकरण महाभाष्य के रचयिता हैl उन्हें ज्ञान और भक्ति की प्राप्ति कोडर झील के किनारे बैठ कर हुई थीl शेषावतार माने जाने वाले पतंजलि त्रिजट ब्राह्मण थेl विद्वानों के अनुसार सूत्रकार, वृत्तिकार और भाष्यकार त्रिजट ब्राह्मणों की तीन जटाओं के प्रतीक हैl  इस संबन्ध मे पतंजलि का अनोखा ' भाष्य ग्रंथ ' विश्व में प्रचलित हुआ। इसकी  शैली सर्वथा भिन्न होने के कारण इस शैली का दूसरा कोई ग्रंथ नही हैl  महर्षि ने काशी को बनारस के नागकुआ के पास अपनी कर्मभूमि बनायीl उन्होंने अपने ग्रंथ महाभाष्य में स्वयं को कई बार गोनर्दीय कहा हैl विद्वानों ने महर्षि पतंजलि की व्याख्या करते हुये लिखा है कि -''पत्रन्ति अज्जलया Sस्मिन इति पतंजलि ''l
 

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