फर्जी FIR कांड: गृह मंत्री अमित शाह और सीएम योगी से मिलेगा पत्रकारों का प्रतिनिधिमंडल

डीएन ब्यूरो

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में एक कुख्यात गुंडे और गैंगेस्टर को सामाजिक कार्यकर्ता दिखाकर एसपी और एएसपी द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों के खिलाफ दर्ज कराये गये फर्जी एफआईआर का मामला अब गरमाता जा रहा है। डाइनामाइट न्यूज़ एक्सक्लूसिव:

पुलिस-प्रशासन व अपराधियों के नापाक गठजोड़ का उत्कृष्ट उदाहरण
पुलिस-प्रशासन व अपराधियों के नापाक गठजोड़ का उत्कृष्ट उदाहरण

नई दिल्ली: भारत सरकार के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार और डाइनामाइट न्यूज़ के एडिटर-इन-चीफ मनोज टिबड़ेवाल आकाश ने सोमवार को राजधानी में मीडिया को एक प्रेस नोट जारी किया है। 

इसमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के पुलिस अधीक्षक रोहित सिंह सजवान और अपर पुलिस अधीक्षक आशुतोष शुक्ला ने एक गंभीर आपराधिक कृत्य किया है। निजी खुन्नस को मिटाने के लिए इन दोनों अफसरों ने एक बड़ा षड़यंत्र रचकर इलाके के कुख्यात गुंडे और हिस्ट्रीशीटर को बतौर वादी खड़ा किया और इसे सामाजिक कार्यकर्ता दिखाकर डाइनामाइट न्यूज़ के पत्रकारों के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज करा दिया। जिले का यह कुख्यात गुंडा हत्या तथा सरकारी अधिकारियों से रंगदारी मांगने जैसे गंभीर मामलों में वांछित है और कुछ दिनों पहले ही गैंगेस्टर एक्ट में जमानत पर जेल से छूटकर बाहर निकला है।

कुख्यात गुंडे और गैंगेस्टर को एसपी व एएसपी ने बताया सामाजिक कार्यकर्ता

पूर्व में जिले में तैनात अलग-अलग जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों ने दो-दो बार इस पर गुंडा एक्ट लगाकर जिला बदर किया है। इस पर एक दर्जन से अधिक संगीन मामले दर्ज हैं। जिस अपराधी पर रासुका की कार्यवाही होनी चाहिये, गैंगेस्टर एक्ट के तहत दर्ज मामले में जिस अपराधी की अवैध संपत्तियों की जब्ती होनी चाहिये, ऐसे कुख्यात अपराधी का इस्तेमाल एसपी और एएसपी द्वारा देश के प्रतिष्ठित पत्रकारों के खिलाफ किया जाना गंभीर किस्म का आपराधिक कृत्य है। इसलिए यह आवश्यक है कि इस मामले में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से जिन-जिन लोगों की भूमिका है, उनका पर्दाफाश किया जाये। यह तभी संभव होगा, जब दर्ज फर्जी एफआईआर समेत सम्पूर्ण प्रकरण की जांच और विवेचना सीबीआई से करायी जाये। 

सात साल से कम नौकरी वाले एसपी रोहित सिंह सजवान की देखिये सरकारी कुंडली

श्री आकाश ने बताया कि नई दिल्ली के विभिन्न प्रतिष्ठित पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों से बातचीत की गयी है और तय किया गया है कि देश के गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से समय लेकर इस सिलसिले में वरिष्ठ पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल मिलेगा तथा आपराधिक कृत्य के दोषी एसपी और एएसपी के खिलाफ सख्त कार्यवाही सुनिश्चित करते हुए इस मुकदमे की विवेचना सीबीआई को सौंपने की मांग करेगा। 

यह भी पढ़ें: पुलिस-अपराधी गठजोड़ का नायाब नमूना, पत्रकारों के खिलाफ फर्जी एफआईआर दर्ज

पत्रकारों ने यह भी तय किया है कि एसपी और एएसपी के इस काले-कांड के खिलाफ एकजुट होकर एक बड़ी लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक लड़ी जायेगी ताकि फिर भविष्य में कोई पुलिस अधिकारी अपने निजी स्वार्थ में किसी पत्रकार पर गलत ढ़ंग से हाथ डालने की हिमाकत न कर सके। 

एक के बाद एक कांडों को अंजाम देने के बावजूद तीन साल से महराजगंज में जमे एएसपी का सरकारी लेखा-जोखा

उल्लेखनीय है कि यूपी के महराजगंज जिले में पुलिस अधीक्षक रोहित सिंह सजवान बीते डेढ़ साल और अपर पुलिस अधीक्षक आशुतोष शुक्ला तीन साल से जमे हुए हैं। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित इस जिले में इन दोनों की चर्चित जोड़ी ने एक के बाद एक कई कांडों को अंजाम दिया है। इन दोनों के राज में जहां गरीब मारे-मारे फिर रहे हैं कि उनकी सच्ची एफआईआर दर्ज की जाये लेकिन इन दोनों अफसरों की करतूतों से यह संभव नहीं लेकिन एक अपराधी की तहरीर पर कैसे कार्यवाही को ये दोनो अफसर मचल उठे? यह कई सवालों को जन्म दे रहा है? 

पुलिस-प्रशासन और अपराधियों के गठजोड़ की उत्कृष्ट मिसाल  

इन दोनों अफसरों ने नई दिल्ली से चलने वाले पांच साल पुराने देश के अंग्रेजी व हिंदी भाषा के निर्भीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद राष्ट्रीय न्यूज़ पोर्टल डाइनामाइट न्यूज़ के पत्रकारों के खिलाफ कोरोना महामारी में गलत खबर प्रकाशित करने का एक झूठा मुकदमा पंजीकृत कराया है। सवाल यह है कि जब रक्षक ही अपराधियों से गठजोड़ कर भक्षक बनेंगे तो फिर समाज में गैरकानूनी कार्यों के खिलाफ आवाज उठायेगा कौन?
 

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