सावधान! भागदौड़ भरी जिंदगी में आप हो रहे हैं इन बीमारियों का शिकार, इस तरह करें बचाव

डीएन संवाददाता

आज हर इंसान महानगरीय जीवन में तमाम तरह की समस्याओं से जूझ रहा है। भागदौड़ भरी जिंदगी और आसपास के माहौल के कारण कई बीमारियां हमारे जीवन में अपने आप दस्तक दे रहीं है, जो कई बार जानलेवा बन जाती है। इन बीमारियों से कैसें रहे दूर..पढ़ें डाइनामाइट न्यूज़ की यह एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

फाइल फोटो
फाइल फोटो

नई दिल्लीः भागमभाग भरी इस जिंदगी में शोर-शराबा सभी के लिए एक खतरा बना हुआ है। हम इसे ध्वनि प्रदूषण के नाम से भी जानते हैं। महानगरों में घर से निकलते ही सड़क पर गाड़ियों का शोर-शराबा व जाम से कोई भी बचा नहीं हैं। बढ़ता ध्वनि प्रदूषण अब हर इंसान की जिंदगी में जहर घोलने लगा है, इससे कई तरह की गंभीर बीमारियों के मामले सामने आ रहे हैं। 

आइए जानते हैं.. ध्वनि प्रदूषण किस तरह लोगों के लिए जी का जंजाल बना गया है और इससे किस तरह हम निजात पा सकते हैं।  

1.    ट्रैफिक के बीच गाड़ियों की आवाज और ट्रैफिक जाम से न सिर्फ प्रदूषण की समस्या पैदा होती हैं बल्कि यह सुनने की क्षमता को भी प्रभावित करता हैं। 

2.    हमारे कान 0-70 डेसिबल तक की आवाज को सुनने की क्षमता रखते हैं। एक रिसर्च में पाया गया कि लगातार 8 घंटे 80 डेसिबल या इससे ज्यादा की आवाज सुनने से इंसान की न सिर्फ आयु कम हो सकती हैं बल्कि इससे आदमी चिढ़चिढ़ा भी होता है। ट्रैफिक में जो हॉर्न की आवाज होती हैं, वह 100 डेसिबल से ज्यादा होती हैं। जिससे कोई भी अनजाने में इसका शिकार हो जाता हैं।

जहां तक संभव हो शोरगुल, तेज ध्वनि और ट्रैफिक में हॉर्न से दूर रहें। यदि आप गाड़ी चला रहें हैं तो हार्न का इस्तेमाल जरूरी होने पर ही करें। 

 

3.    ईयरफोन और लाउडस्पीकर भी काफी घातक हैं। तकनीकीकरण के इस दौर में आज हमारे पास संसाधनों की भरमार हैं। हर किसी के हाथ में मोबाइल आम बात हैं। लेकिन मोबाइल में ईयरफोन लगाकर जब हम बाहर निकलते हैं तो ये भी भूल जाते हैं कि आगे से गाड़ी जा रही हैं। पुलिस के पास आए दिन ट्रेन से कटकर व गाड़ियों से टकराकर हुई कई लोगों की मौतों की एक लंबी लिस्ट हैं।

इसलिये भूलकर भी गाड़ी चलाते वक्त या सड़क पर चलते समय किसी भी रोड यूजर्स को ईयरफोन या मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिये। 

4.    पूरे दिनभर शोर- शराबे में रहने के कारण जब हम बिस्तर में सोने के लिए जाते हैं तो हमें नींद ही नहीं आती हैं। जब डॉक्टर के पास में नींद की समस्या को लेकर जाते हैं तो पता चलता हैं कि यह सब गाड़ियों की तेज आवाज और शोरगुल भरे वातावरण में रहने के कारण हो रहा है। 

तेज शोरगुल से दूर रहें और सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करें। 

5.    काफी देर तक तेज आवाज में गाने सुनने और शोरगुल में रहने से न सिर्फ मानसिक तनाव बढ़ रहा हैं बल्कि इससे बाल भी झड़ रहे हैं। वहीं कईयों को तो चक्कर और सनसनाहट होने के साथ- साथ कान को परदों को नुकसान होने से छन- छन की आवाज आने लगती हैं। वहीं डॉक्टरों का कहना हैं शोरगुल से कैंसर का भी खतरा हैं।

6.    85 डेसीबल से अधिक ध्वनि सुनने से दिल की धड़कनें बढ़ने लगती हैं। रक्त का प्रवाह बढ़ने से आप अनजाने में ब्लड प्रेशर का भी शिकार हो रहे हैं। ध्वनि विशेषज्ञों का कहना हैं कि इससे हार्ट-अटैक की भी समस्या हो सकती हैं।

 

7.    युवा तो इसके शिकार हो रही हैं, साथ ही गर्भवती महिलाओं पर भी ध्वनि प्रदूषण का खराब असर पड़ रहा ।हैं इससे उनके शिशु पर भी घातक असर पड़ रहा हैं, इसलिए उन्हें भीड़भाड़ वाली जगह जाने से बचना चाहिए।

कहा जाता है कि इलाज से परहेज हमेशा अच्छा होता है, इसलिये जहां तक संभव हो ज्यादा शोरगुल से दूर रहें। तेज आवाज में डीजे-म्यूजिक, हॉर्न न बजाएं। नियमित तौर पर योगाभ्यास और कसरत करें। समय-समय पर चिकित्सक से स्वास्थ्य जांच कराते रहें। मन हमेशा शांत रखें और बीच-बीच में किसी अच्छी जगह घूमने के लिये जरूर जाएं। 


ध्वनि प्रदूषण( विनियमन और नियंत्रण) नियम,2000

बता दें कि 14 फरवरी 2000 को केंद्र सरकार ने पर्यावरण( संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत सार्वजनिक स्थलों में विभिन्न स्रोतों द्वारा होने वाले ध्वनि प्रदूषण के बढ़ते स्तर को नियंत्रित करने के लिए ध्वनि प्रदूषण( विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 को लाया गया। इसके तहत ध्वनि पैदा करने वाले उपकरणों पर रोक लगा दी गई हैं। इसके बावजूद मामले थमने की बजाय बढ़ते जा रहे हैं। इससे न सिर्फ रोडरेज के मामले बढ़ रहे हैं बल्कि लोग एक- दूसरे की जान लेने पर भी उतारू है।
 

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