दिल्ली में भी शुरु हुआ "एक विधान एक संविधान" अभियान

डीएन ब्यूरो

जनसंघ के संस्थापक डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जन्मदिन पर "एक विधान एक संविधान" अभियान की शुरुआत करते हुए भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने दिया एक नया नारा -एक विधान - एक संविधान, एक संहिता - एक निशान, समान शिक्षा समान अवसर, एक राष्ट्रभाषा - एक राष्ट्रगान। पढ़ें डाइनामाइट न्यूज़ विशेष..

अभियान की शुरुआत का दृश्य
अभियान की शुरुआत का दृश्य

नई दिल्ली: समान शिक्षा, समान चिकित्सा, समान नागरिक संहिता, आर्टिकल 35A, आर्टिकल 370, जनसंख्या नियंत्रण, रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठ तथा तलाक, हलाला, मुताह, मिस्यार और बहुविवाह जैसे विषयों पर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में अब तक 50 से अधिक जनहित याचिका दाखिल करने वाले भाजपा नेता और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने जनसंघ के संस्थापक डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जन्मदिन पर "एक विधान एक संविधान" अभियान शुरू किया। मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि संविधान दो शब्दों 'सम' और 'विधान' से मिलकर बना है। सम का अर्थ है समान अर्थात ऐसा विधान जो भारत के सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है, उसे संविधान कहते हैं।

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उपाध्याय ने कहा कि भारत एक सेक्युलर देश है और हमारे संविधान निर्माताओं ने "एक देश एक विधान" का सपना देखा था लेकिन वर्तमान समय में "एक देश अनेक विधान" चल रहा है। आर्टिकल 14 सबको समानता का अधिकार देता है, आर्टिकल 15 जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र या लिंग के आधार पर भेद का विरोध करता है, आर्टिकल 44 समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश देता है इससे स्पष्ट है कि जाति धर्म या लिंग के आधार पर बने कानून असंवैधानिक है लेकिन वोटबैंक राजनीति के कारण आजादी के 70 साल बाद भी धार्मिक आधार पर हिंदू मुसलमान ईसाई पारसी के लिए अलग-अलग कानून, लिंग के आधार पर महिला पुरुष के लिए अलग-अलग कानून तथा जाति के आधार सवर्ण, पिछड़ा और दलित के लिए अलग-अलग कानून लागू है जो हमारे संविधान की मूल भावना के समता और समानता के खिलाफ है।

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उपाध्याय ने कहा कि समान शिक्षा अर्थात समान पाठ्यक्रम लागू किये बिना सभी बच्चों को समान अवसर उपलब्ध कराना नामुंकिन हैI पठन-पाठन का माध्यम भले ही अलग हो लेकिन पाठ्यक्रम पूरे देश में एक समान होना चाहिए। देश का दुर्भाग्य है कि “एक देश-एक कर” की भांति “एक देश-एक शिक्षा” लागू करने के लिए आजतक गंभीर प्रयास नहीं किया गया। गरीब बच्चों को समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक केंद्रीय विद्यालय और एक नवोदय स्कूल खोलना बहुत जरुरी है।

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तीन तलाक को सुप्रीम कोर्ट में सबसे पहले अश्विनी उपाध्याय ने चैलेन्ज किया था और सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को अवैध घोषित कर दिया। बहुविवाह, निकाह हलाला, निकाह मुताह, निकाह मिस्यार और शरिया अदालत पर प्रतिबंध की मांग वाली  उपाध्याय की जनहित याचिका एक साल से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है लेकिन केंद्र सरकार ने अभीतक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया। रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों का एक साल में निष्कासन तथा अल्पसंख्यक की परिभाषा घोषित करने, उनकी पहचान करने का नियम बनाने और आठ राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की मांग वाली उपाध्याय की जनहित याचिका 2017 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है लेकिन केंद्र सरकार ने अभीतक अपना जबाब दाखिल नहीं किया। पूरे देश में शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और भारत को नशा-मुक्त और शराब-मुक्त देश घोषित करने की मांग वाली अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह सरकार का कार्य है। प्रत्येक माह के प्रथम रविवार को 'पोलियो दिवस' के स्थान पर 'स्वास्थ्य दिवस' मनाने और गरीबों को कंडोम तथा गर्भ निरोधक गोलियां मुफ्त में देने की मांग वाली अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट पहले ही निर्देश दे चुका है।

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