बलरामपुर में धम्म यात्रा का भव्य स्वागतः शांति, एकता और अहिंसा का संदेश
बौद्ध अनुयाइयों की धम्म यात्रा जिले में पहुंची। यात्रा में नेपाल, श्रीलंका तिब्बत, ताइवान आदि देशोंके बौद्ध भिक्षु शामिल हुए। पढ़िए डाइनामाइट की रिपोर्ट

बलरामपुर: जिले में बौद्ध अनुयायियों की धम्म यात्रा शांति, एकता और अहिंसा का संदेश देते हुए लाल नगर पहुंची, जहां स्थानीय लोगों और बौद्ध धर्मावलंबियों ने यात्रा का भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर भारत में नेपाल के राजदूत शंकर प्रसाद शर्मा और म्यांमार गणराज्य संघ के राजदूत थिन प्यंत थिंड क्याव ने यात्रा को संबोधित किया और बौद्ध धर्म के विस्तार और भारत-नेपाल संबंधों पर अपने विचार व्यक्त किए।
नेपाल और म्यांमार के राजदूतों की मौजूदगी
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के मुताबिक, बलरामपुर में धम्म यात्रा के आगमन पर नेपाल और म्यांमार के राजदूतों ने इसका विशेष महत्व बताया। नेपाल के राजदूत शंकर प्रसाद शर्मा ने कहा कि इस यात्रा से बौद्ध सर्किट को बढ़ावा मिलेगा, जिससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन का विस्तार होगा।
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उन्होंने भारत-नेपाल के मजबूत संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को और प्रगाढ़ करेगी। म्यांमार संघ गणराज्य के राजदूत थिन प्यंट थिंड क्याव ने कहा कि भगवान बुद्ध का संदेश पूरे विश्व के लिए प्रासंगिक है और इस तरह की तीर्थयात्राएं समाज में शांति, प्रेम और अहिंसा को बढ़ावा देती हैं।
भगवान बुद्ध की प्रतिमाओं का अनावरण
लाल नगर में भगवान तथागत बुद्ध के चार स्वरूपों की प्रतिमाओं का अनावरण किया गया, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का विशेष केंद्र बनीं। इस अवसर पर नेपाल, श्रीलंका, तिब्बत, ताइवान समेत कई देशों के बौद्ध भिक्षुओं ने भाग लिया और भगवान बुद्ध की शिक्षाओं पर अपने विचार व्यक्त किए।
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पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
बुद्ध वेलफेयर सोसाइटी इंडिया के प्रतिनिधि दिवाकर पटेल ने कहा कि उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग और बुद्ध वेलफेयर सोसाइटी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस कार्यक्रम से क्षेत्र में बौद्ध सर्किट को मजबूती मिलेगी। इससे न केवल बौद्ध अनुयायियों को आध्यात्मिक प्रेरणा मिलेगी, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। धम्म यात्रा के माध्यम से भारत में बौद्ध धर्म के प्राचीन स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने तथा उनके संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने इस पहल की सराहना की और यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए इसे एक नई शुरुआत बताया।