Agra Elderly Couple Wedding: आगरा में हुई अनोखी शादी, दो बुजुर्गों ने थामा एक-दूजे का हाथ, देखिए रुला देने वाली कहानी

डीएन ब्यूरो

उम्र चाहे कोई भी हो, जिंदगी हर मोड़ पर एक नई शुरुआत का मौका देती है, डाइनामाइट न्यूज़ की इस रिपोर्ट में जानिए कि कैसे उम्र की परवाह किये बिना बुज़ुर्गों ने साथ रहने का फैसला लिया

शादी के बंधन में बंधे दो बुजुर्ग
शादी के बंधन में बंधे दो बुजुर्ग


आगरा: कहते हैं प्यार और जीवनसाथी की तलाश किसी उम्र की मोहताज नहीं होती। कुछ ऐसा ही मिसाल बना आगरा का रामलाल वृद्धाश्रम, जहां 66 वर्षीय मुन्नालाल और 57 वर्षीय प्रमिला ने सात फेरे लेकर एक नई जिंदगी की शुरुआत की।

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, गुरुवार को हुए इस अनोखे विवाह समारोह में वृद्धाश्रम के 300 से ज्यादा बुजुर्ग बराती बने और शादी की सभी रस्मों में पूरे दिल से हिस्सा लिया। आश्रम में हल्दी, मेहंदी से लेकर बारात और सात फेरों तक हर रस्म धूमधाम से निभाई गई। ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच जब मुन्नालाल और प्रमिला ने एक-दूजे का हाथ थामा, तो हर आंख नम हो गई।

मुसीबतों में बीता जीवन फिर आश्रम में मिला सहारा

यह भी पढ़ें | UP Politics: CM Yogi और PM Modi के बीच मुलाकात के बाद सुगबुगाहट तेज, किसका कटेगा पत्ता और किसकी बचेगी लाज?

जालौन निवासी मुन्नालाल को उनके बच्चों ने घर से निकाल दिया था। मां के साथ दर-दर भटकते हुए वह रामलाल वृद्धाश्रम पहुंचे। वहीं बुलंदशहर की रहने वाली प्रमिला का जीवन भी संघर्षों से भरा रहा। पति और बेटियों की मौत के बाद ससुराल वालों ने उन्हें बेघर कर दिया। ऐसे में आश्रम उनका नया ठिकाना बना।

आश्रम में रहने के दौरान दोनों के बीच अपनापन बढ़ा। प्रमिला, मुन्नालाल की 90 वर्षीय मां की सेवा में जुट गईं। एक-दूजे का दुख-दर्द समझने के बाद दोनों ने साथ जिंदगी बिताने का फैसला किया।

अध्यक्ष ने निभाई कन्यादान की रस्म

यह भी पढ़ें | Uttar Pradesh: यूपी के अफसरों ने किया गजब कारनामा, जानिये हैरान करने वाला मामला

शादी में आश्रम के अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा ने प्रमिला के पिता की भूमिका निभाई और कन्यादान किया। इस भावुक क्षण में वहां मौजूद सभी बुजुर्गों की आंखें भर आईं। वहीं आश्रम के अन्य बुजुर्ग माता-पिता ने मुन्नालाल के परिवार का दायित्व निभाया।

मुन्नालाल की 90 वर्षीय मां ने भी बेटे और बहू को आशीर्वाद दिया। पूरे समारोह में सबसे भावुक पल वही था, जब एक मां ने अपने बेटे की शादी देखी और वर-वधू को अपने हाथों से आशीर्वाद दिया। इस दौरान आश्रम के बुजुर्गों ने कहा, "जो जोड़ियां ऊपर बनती हैं, वह कभी न कभी धरती पर मिल ही जाती हैं।" मुन्नालाल और प्रमिला की यह शादी इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण बन गई।

वृद्धाश्रम में गूंजे शहनाई के सुर और बुजुर्गों की खुशियों ने साबित कर दिया कि उम्र चाहे कोई भी हो, जिंदगी हर मोड़ पर एक नई शुरुआत का मौका देती है।










संबंधित समाचार