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नई दिल्ली: आज पूरी दुनिया में विश्व गौरैया दिवस मनाया जा रहा है। यह दिवस हर साल 20 मार्च को मनाया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य गोरैया एंव अन्य प्रजातियों की पक्षियों की घटती जनसंख्या के प्रति लोगों को जागरूक करना है।
डाइनामाइट न्यूज़ के संवाददाता के अनुसार, आजकल शहरों में पक्षियां काफी कम दिखाई दे रही हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि हम लोग लगातार मकान बना रहे हैं, जिसके चलते पेड़ों को काट रहे हैं। जब शहर में पेड़ ही नहीं रहेंगे तो पक्षियां कहां रहेंगी, क्योंकि उनका बसेरा तो पेड़ों में ही होता है। ऐसे में पक्षियां शहर छोड़कर जंगलों में चली जाती हैं और कुछ तो इस वजह से लुप्त भी हो गई हैं।
आइए आपको विस्तार से विश्व गौरैया दिवस के बारे में बताते हैं कि इसकी शुरूआत कहां से हुई, क्या महत्व है और इस साल क्या थीम है ? बिना समय बर्बाद किए फटाफट जान लेते हैं।
विश्व गौरैया दिवस 2025 की थीम
हर दिवस हर साल एक थीम पर आधारित होता है। ऐसे में विश्व गौरैया दिवस की इस साल की थीम "प्रकृति के नन्हें दूतों को सम्मान (A tribute to nature's tiny messengers)" है। इस थीम का उद्देश्य यह है कि पारिस्थितिकी में संतुलन बनाने के लिए गोरैया की मुख्य भूमिका होती है।
विश्व गौरैया दिवस का महत्व
शहरों में बढ़ते प्रदूषण और आवास के चलते गोरैया विलुप्त हो रहे हैं जिसके कारण पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है। इस दिवस को मनाकर लोग जागरूक हो सके और बचे गोरैय व अन्य पक्षियों को बचा सकें।
विश्व गौरैया दिवस का इतिहास
विश्व गौरैया दिवस की शुरूआत साल 2010 में हुई थी जिसकी पहल भारत की नेचर फॉरएवर सोसाइटी और फ्रांस की इको-सिस एक्शन फाउंडेशन ने की थी। इन दोनों के मिलकर पूरे दुनियाभर में इस दिवस के महत्व को समझाया।
Published : 20 March 2025, 1:33 PM IST
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