Chandrayaan-5 से चांद पर जाएंगे इंसान? देखिए क्या है ISRO नया का प्लान
केंद्र सरकार ने चंद्रयान-5 मिशन को मंजूरी दे दी है। ऐसे में यह उम्मीद है कि जल्द ही चांद की सतह पर चंद्रयान-5 उतरेगा। ऐसे में क्या इंसान का चांद पर जाने का सपना पूरा होगा या नहीं? पढ़िए डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट
नई दिल्ली: भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष अभियानों को और आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने चंद्रयान-5 मिशन को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही इस बात की जानकारी भी सामने आई है कि भारत का चंद्रयान-4 मिशन कब तक लॉन्च किया जाएगा।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि चंद्रयान-5 मिशन जापान के सहयोग से संचालित किया जाएगा। चंद्रयान-5 के तहत 250 किलोग्राम वजन का रोवर चंद्रमा की सतह पर भेजा जाएगा, जो वहां पर रिसर्च करेगा।
चंद्रयान-4 का क्या है स्टेटस?
इससे पहले चंद्रयान-4 को 2 साल बाद 2027 में लॉन्च किए जाने की योजना बनाई जा रही है। इसरो प्रमुख ने बताया इस मिशन का उद्देश्य चंद्रमा की सतह से नमूने इकट्ठा करना और उन्हें पृथ्वी पर वापस लाना है। इसके लिए एक विशेष तकनीक विकसित की जा रही है, जिससे चंद्रमा की मिट्टी और चट्टानों के नमूने सुरक्षित वापस पृथ्वी पर लाए जा सकेंगे।
अब तक के चंद्र मिशन
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भारत के अब तक के मून मिशन्स की जब भी बात की जाती है तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। ऐसे में चलिए आपको याद दिलाते हैं भारत के चंद्र मिशनों की अब तक की यात्रा के बारे में...
चंद्रयान-1 जो साल 2008 में सफतापूर्वक लॉन्च हुआ वो भारत का पहला चंद्र मिशन था, जिसने चंद्रमा के रासायनिक, खनिज और फोटो-भूवैज्ञानिक डेटा को कलेक्ट किया था।
चंद्रयान-2 को 2019 में लॉन्च किया गया था। ये मिशन 98% सफल रहा, हालांकि लैंडर विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग नहीं हो पाई। मिशन पूरी तरह से सफल नहीं हो पाया जिससे पूरे देश का दिल टूट गया था, लेकिन इसरो प्रमुख नारायणन का कहना है कि चंद्रयान-2 पर लगा हाई रिजोल्यूशन कैमरा अभी भी सैकड़ों तस्वीरें भेज रहा है।
23 अगस्त 2023 को भारत ने उस समय इतिहास रच दिया, जब चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग की थी। इस मिशन में 25 किलो का रोवर ‘प्रज्ञान’ भेजा गया था, जिसने कई अहम जानकारियां भेजी। चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के 23 स्थानों पर रासायनिक तत्वों की मौजूदगी का पता लगाया। साथ ही सतह पर एल्युमिनियम, सल्फर, कैल्शियम, आयरन, क्रोमियम और टाइटेनियम के बारे में पता लगाया। इसके अलावा चंद्रमा की सतह पर ऑक्सीजन, जल वाष्प और CO2 का पता लगाया गया है।
अब देखना होगा कि चंद्रायन-4 और चंद्रयान-5 मिशन से क्या क्या जानकारी हासिल होती है। अब ये भी देखना दिलचस्प होगा कि क्या चंद्रयान-5 से चांद पर इंसानों को भेजने का रास्ता साफ हो पाएगा या नहीं। बता दें कि अब तक चांद पर इंसान को भेजने का कारनामा सिर्फ अमेरिका ही कर पाया है। हालांकि, अमेरिका के अपोलो मिशन्स को अब 50 साल से ज्यादा हो चुके हैं।
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भविष्य की योजनाएं
चंद्रयान-5 मिशन के अलावा भारत के भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करें तो इसरो के मुताबिक, भारत आने वाले समय में कई बड़े अंतरिक्ष अभियानों पर काम कर रहा है। जिसमें गगनयान मिशन 2025 शामिल है। इसरो इस साल तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की कक्षा में भेजने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा इसरो भारत के पहले स्वदेशी स्पेस स्टेशन की योजना पर भी तेजी से काम कर रहा है।
देश ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में तरक्की करते हुए विश्व के सामने जो छाप छोड़ी है इसकी वजह से आज पूरा विश्व भारत को उम्मीद की नजरों से देखने लगा है। अब अगर भारत अपने आने वाले मिशन्स में भी सफलता पा लेता है तो ये हर भारतीय के लिए गर्व की बात होगी।