DN Exclusive: महराजगंज लोकसभा सीट पर बड़े उलटफेर की संभावना, अमरमणि कुनबे के तेवरों से लोग हुए हैरान

शिवेन्द्र चतुर्वेदी/अरुण गौतम/कार्तिकेय पांडेय

क्या महराजगंज लोकसभा सीट पर 2009 का इतिहास दोहराया जायेगा? क्या अल्पसंख्यक मतदाता एक बार फिर इस सीट पर निर्णायक भूमिका निभाने जा रहा है? आखिर 17वीं लोकसभा में देश की सबसे बड़ी पंचायत में महराजगंज सीट का प्रतिनिधित्व कौन करेगा? ये ऐसे सवाल हैं जिसका जवाब 63-लोकसभा का हर एक मतदाता एक दूसरे से पूछ रहा है। जिले के नंबर 1 मीडिया समूह डाइनामाइट न्यूज़ के तेज-तर्रार खोजी संवाददाताओं ने इस सवाल के जवाब के लिए पांचों विधानसभाओं के मतदाताओं की नब्ज टटोली। एक्सक्लूसिव रिपोर्ट..

गुलाम नबी आजाद के साथ अमनमणि त्रिपाठी रोजा इफ्तार में

महराजगंज: कल तक डमी समझी जाने वाली कांग्रेस प्रत्याशी सुप्रिया श्रीनेत ने चुनावी फिजा में जबरदस्त ढ़ंग से वापसी की है और तेजी से बदलते समीकरणों के बीच मुख्य मुकाबले में आ गयी हैं। 

डाइनामाइट न्यूज़ के खोजी संवाददाताओं की पड़ताल में यह तथ्य निकलकर सामने आया है कि जिले के अल्पसंख्यक मतदाताओं का पिछले दो दिनों में काफी तेजी से कांग्रेस की तरफ रुझान बढ़ा है और यदि यही माहौल अंत तक बना रहा तो फिर 2009 का इतिहास यहां पर दोहराया जा सकता है।

भाजपा प्रत्याशी पंकज चौधरी के समर्थक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम पर अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं तो वहीं पर गठबंधन प्रत्याशी के समर्थक वोट बैंक के दम पर कह रहे हैं कि उन्हें जीत से कोई रोक नही सकता लेकिन मतदाताओं की राय जुदा है। इनका कहना है कि वे किसी नये चेहरे पर दांव लगाना चाहते हैं, भाजपा व सपा के उम्मीदवारों को हम मौका देकर देख चुके हैं, बेहतर होगा कोई नया चेहरा हमारा प्रतिनिधित्व करे। 

डाइनामाइट न्यूज़ की पड़ताल में यह तथ्य सामने आय़ा है कि नामांकन से पहले तक तीसरे स्थान पर समझी जाने वाली कांग्रेस प्रत्याशी अपनी सधी रणनीति और तेजी से हो रहे अल्पसंख्यक मतदाताओं के झुकाव के चलते मुख्य लड़ाई में आ चुकी हैं। माहौल में ये बदलाव तब है जब अभी तक कांग्रेस के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का दौरा जिले में नहीं हुआ है। इधर भाजपा प्रत्याशी को निराश करने वाली बात ये है कि पीएम मोदी का दौरा महराजगंज में अब तक तय नही हो पाया है।

फ्लैशबैक में देखें तो 2009 में कांग्रेस के उम्मीदवार बिना किसी मजबूत सांगठनिक ढ़ांचे के बावजूद अंतिम तीन दिनों में अल्पसंख्यकों के बदले तेवरों की वजह से 1 लाख 31 हजार वोटों से जीत हासिल करने में सफल रहे थे और जब अल्पसंख्यकों ने साथ छोड़ा तो 2014 में महज 54 हजार वोटों पर आकर अपनी जमानत तक जब्त करा बैठे।

इस चुनाव में सबसे पहले हार्दिक पटेल, फिर पी. चिंदबरम और इसके बाद राजबब्बर के ताबड़तोड़ दौरे कराकर कांग्रेस नेतृत्व ने यह साबित कर दिया कि वे महराजगंज की सीट को लेकर काफी गंभीर हैं। इस बात में और दम मिला गुलाम नबी आजाद के दौरे को लेकर। आजाद इस समय राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री से लेकर भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्री तक रह चुके हैं। इस बड़े कद के नेता ने जिस तरह से लगातार दो दिन तक महराजगंज जिले के एक-एक प्रमुख इलाके का दौरा किया और अल्पसंख्यक मतदाताओं में भरोसा पैदा किया उससे चुनावी दिशा बदलती दिख रही है। दलितों का भरोसा जीतने के लिए पीएल पुनिया ने महराजगंज में मोर्चा संभाला है। 

राजबब्बर के साथ कांग्रेस नेत्री तलत अजीज  

कांग्रेस की इस रणनीति में सबसे बड़ा तड़का लगाया पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के तेवरों ने। महराजगंज जिले की राजनीति में अपना खास दबदबा रखने वाले अमरमणि के कद का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इन्होंने अपने पुत्र को भाजपा की सुनामी के बावजूद भी निर्दलीय विधानसभा में जीतवा दिया.. वो भी तब जब अमरमणि से लेकर अमनमणि तक जेल में होने की वजह से एक भी सेकेंड चुनाव मैदान में प्रचार के लिए नही जा सके थे। 

पूर्व मंत्री अमरमणि के बदले तेवरों से जनता में यह भी संदेश तेजी से जा रहा है कि अल्पसंख्यकों के अलावा ब्राम्हण व अन्य वर्ग भी भाजपा से छिटककर कांग्रेस की तरफ जा सकता है। इनका पूरा कुनबा खुलकर दो दिनों तक गुलाम नबी आजाद के साथ जिले भर में रोजा-इफ्तारों में खुलेआम दिखा। इसके अलावा कांग्रेस प्रत्याशी को अल्पसंख्यकों के बीच बढ़त बनाने में यदि सबसे बड़ी मदद वाकई किसी ने की तो वे हैं कांग्रेस नेत्री तलत अजीज। हमारे संवाददाताओं की खोजी रिपोर्ट में यह तथ्य निकला कि तलत अजीज पिछले 4 महीने से लगातार दिन-रात एक कर अल्पसंख्यकों के बीच घूम रही हैं और अपने साथ हुए अन्याय की दुहाई देकर कांग्रेस के लिए वोट मांग रही हैं। 

अब देखना दिलचस्प होगा कि आखिर जनता 23 मई को विजय का सेहरा किसे पहनाती है? 

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