Farmer protest at Shambhu border: 13 महीने बाद फिर खुला रास्ता, किसानों का संघर्ष अभी भी जारी
पिछले 13 महीने से बंद शंभू बॉर्डर खुला। जानिए क्यों बंद था शंभू बॉर्डर। पढ़िए डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट

नई दिल्ली: पिछले 13 महीने से बंद शंभू बॉर्डर अब लोगों के लिए खोल दिया गया है। पिछले एक साल से किसान यहां पर बैठे हुए थे। लेकिन गुरूवार को पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बॉर्डर से बैरिकेड्स को हटा दिया गया है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, धरने के कारण पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है, जिसके चलते किसान नेताओं सरवन सिंह पंधेर और जगजीत सिंह डल्लेवाल सहित करीब 200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है।
अमृतसर-दिल्ली हाईवे पर टोल प्लाजा बंद
किसान नेताओं के गिरफ्तार होने के बावजूद उनका विरोध जारी है। उन्होंने अमृतसर-दिल्ली हाईवे पर टोल प्लाजा को बंद कर दिया है। किसानों का कहना है कि उनका धरना तब तक जारी रहेगा, जब तक उनके नेताओं को रिहा नहीं किया जाता। इसके साथ ही पंजाब के मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा है कि किसानों की मांगें केंद्र से हैं और उन्हें दिल्ली में प्रदर्शन करना चाहिए, न कि पंजाब की सड़कों को जाम करना चाहिए।
13 महीने लंबी लड़ाई की शुरुआत
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किसान आंदोलन की शुरुआत पिछले साल 13 फरवरी को हुई थी, जब संयुक्त किसान मोर्चा और किसान मजदूर मोर्चा के नेतृत्व में किसान शंभू और खनौरी बॉर्डर पर डेरा डालकर दिल्ली कूच करने की योजना बना रहे थे।
पुलिस ने दिल्ली की सुरक्षा कड़ी कर दी थी, जिसके बाद किसान शंभू बॉर्डर पर ही धरने पर बैठ गए। दिल्ली में प्रवेश न करने की वजह से किसानों का गुस्सा बढ़ गया था और शंभू बॉर्डर पर उनका आंदोलन शुरू हो गया।
किसानों की प्रमुख मांगें एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, पेंशन, बिजली दरों में बढ़ोतरी न करना, पुलिस मामलों को वापस लेना और उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों को न्याय दिलाना थीं।
इसके अलावा किसान चाहते थे कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 को बहाल किया जाए और 2020-21 में आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों के परिवारों को मुआवजा दिया जाए।
किसानों के प्रमुख मुद्दे
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किसानों ने कई मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया है। वे पेंशन, कर्ज माफी, नकली बीज, कीटनाशक और खाद बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, और ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत कार्य दिवसों की संख्या को दोगुना करने की मांग कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि सरकार ने जो वादे किए थे, वे उन्हें पूरा नहीं कर रही है, और अब वे एक बार फिर अपनी आवाज़ उठाने के लिए सड़कों पर हैं।
किसान और केंद्र सरकार के बीच 7 दौर में हुई बातचीत
किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच अब तक 7 दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई है। आखिरी बैठक 19 मार्च को हुई थी, जिसमें पंजाब सरकार के मंत्री हरपाल सिंह चीमा भी मौजूद थे।
सरकार ने किसान नेताओं से कहा है कि वे एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी की बात करने से पहले अन्य संबंधित स्टेकहोल्डर्स जैसे व्यापारी, आढ़ती और कंज्यूमर की राय लें, और फिर 4 मई को चंडीगढ़ में अगली बैठक होगी।