स्कॉट मॉरीसन बने ऑस्ट्रेलिया के नये प्रधानमंत्री, भारतीय संबंधों को आगे बढ़ाने की होगी चुनौती

डीएन ब्यूरो

लिबरल पार्टी के स्कॉट मॉरीसन ऑस्ट्रेलिया के नये प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री के रूप में भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों को आगे बढ़ाने की उन पर एक नई जिम्मेदारी होगी। स्कॉट के पीएम बनने के बाद भारत-आस्ट्रेलिया संबंधों पर क्या असर पड़ेगा, जाने डाइनामाइट न्यूज़ की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में

स्कॉट मॉरीसन
स्कॉट मॉरीसन

कैनबरा: लिबरल पार्टी के स्कॉट मॉरीसन अब ऑस्ट्रेलिया के नए प्रधानमंत्री पद की कमान संभालने जा रहे हैं। उन्होंने पीटर ड्यूटॉन को 45-40 के अंतर से मात दी। अपनी इस जीत पर मॉरीसन ने कहा कि फिलहाल मैं कुछ कहने की स्थिति में नहीं हूं। बता दें कि स्कॉट एक पुलिस अधिकारी के बेटे हैं, उन्हें प्यार से स्कोमो भी बुलाया जाता है। इस जीत के बाद वे अब ऑस्ट्रेलिया के 30वें प्रधानमंत्री होंगे। मॉरीसन को लेकर कहा जाता है कि वे टर्नबुल के समर्थक रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में 11 सालों में यह छठा मौका है जब प्रधानमंत्री का चुनाव हुआ है। मॉरीसन अब टर्नबुल की जगह लेंगे। 

स्कॉट मॉरीसन के प्रधानमंत्री बनने के क्या मायने हैं और उनका भारत की तरफ किस तरह से रुझान रहेगा ? वहीं उनसे पहले प्रधानमंत्री रहे दूसरे ऑस्ट्रेलियाई नेताओं के साथ भारत के साथ किस तरह के संबंध रहे। पेश है डाइनामाइट न्यूज़ की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: 

भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों पर प्रभाव 

केंद्र की सत्ता पर काबिज होने के बाद मोदी ऑस्ट्रेलिया का कई बार दौरा चुके हैं। वहीं वर्तमान में प्रधानमंत्री टर्नबुल भी अपने प्रतिनिमंडल के साथ भारत आ चुके हैं। यहां उन्होंने आपसी सामरिक भागीदारी को सशक्त बनाने और आपसी विश्वास को नए स्तर तक ले जाने में प्रितबद्धता जाहिर की थी। वहीं द्विपक्षीय असैन्य परमाणु सहयोग पर भी हस्ताक्षर किए गये थे। इसका दोनों देशों ने स्वागत किया था। वहीं दोनों देशों ने समझौतों के आदान प्रदान के बाद टर्नबुल और मोदी ने वीडियो- क्रॉफ्रेसिंग कर हरियाणा के गुरुग्राम स्थित टेरी के हरित परिसर में टेरी- डिकिन नैनोबायोटेक्नोलॉजी सेंटर( टीडीएनबीसी) का संयुक्त रूप से उद्घाटन भी किया था। इसे अत्याधुनिक विज्ञान व प्रौद्योगिकी सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी माना जा रहा था। टीडीएनबीसी भारत में नैनोबायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में शोध का एक प्रमुख केंद्र है। यह केंद्र टीडीएनबीसी, भारत तथा ऑस्ट्रेलिया के डिकिन यूनिवर्सिटी (डीयू) के सहयोग से संयुक्त पीएडी पाठ्यक्रम चलाता है, जिसके लिए चयनित छात्रों को छात्रवृत्ति, टीडीएनबीसी तथा डीयू द्वारा संयुक्त मार्गदर्शन तथा डिकिन यूनिवर्सिटी द्वारा डिग्री दी जाती है। स्कॉट मॉरीसन पर अब इसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। 

यूरेनियम करार पर नजर

स्कॉट मॉरीसन पर भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए यूरेनियम करार को भी सुचारी ढंग से आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। इसके मुताबिक ऑस्ट्रेलिया भारत को यूरेनियम ईंधन बेचने का और भारत को अपनी बढ़ती ऊर्जा संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा।

भारतीय छात्रों की सुरक्षा महत्वपूर्ण

मॉरीसन को यह ध्यान देना होगा कि एक बार मोदी ने दोनों देशों के बीच छात्रों के आदान-प्रदान पर जोर देते हुए कहा था कि ऑस्ट्रेलिया में भारत के 60 हजार से अधिक छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बात अगर में भारत में शिक्षा ग्रहण करने वाले ऑस्ट्रलिया के छात्रों की करें तो इनकी भी संख्या यहां तेजी से बढ़ी है। इस बारे में प्रधानमंत्री मोदी की टर्नबुल से इस बारे में बात भी हुई थी कि ऑस्ट्रेलिया में कौन- कौन से विश्वविद्यालय भारत के इस उद्देश्य को पूरा करने में योगदान कर सकते हैं। अब मॉरीसन पर भी इसे आगे बढ़ाने और ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर होने वाले हमलों को लेकर भी सुरक्षा पर खासा ध्यान देना होगा। 

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अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सहयोग

बता दें कि दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर गहरी चर्चा हुई थी। पूर्वी एशिया सम्मेलन में ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच बढ़े हुए क्षेत्रीय सहयोग के लिए उल्लेखनीय क्षमता पर बल दिया। यहां प्रभावी बहुपक्षवाद और उनके प्रतिनिधक अंतर्राष्ट्रीय संस्सथानों की जरूरतों की पुष्टि की जो कि 21वीं सदी की वास्तविकताओं को प्रदर्शित करती है। वहीं ऑस्ट्रेलिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत के लिए एक स्थायी स्थान के लिए ऑस्ट्रेलिया द्वारा सशक्त समर्थन देने की बात दोहराई थी। वहीं अब मॉरीसन को देखना होगा कि वह इसे किस तरह से संभालते हैं और भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों में किस तरह से नए रिश्ते कायम करते हैं। 

जी-20 शिखर सम्मेलन

ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा में हुए जी- 20 शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री टोनी एबट को बधाई दी थी। मोदी ने अपने भाषण में पुराने संबंधों को दोहराते हुए ऑस्ट्रेलियाई वकील जॉन जॉन लैंड का ज़िक्र करते हुए कहा कि जॉन लैंड ने भारत की स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रानी लक्ष्मीबाई के लिए ब्रिटिश सरकार से क़ानूनी लड़ाई लड़ी थी। साथ ही उन्होंने क्रिकेटर डॉन ब्रैडमैन, शेन वार्न और भारत के सचिन तेंदुलकर का ज़िक्र कर क्रिकेट के ज़रिए सासंदों का दिल जीतने की कोशिश की। अब जब स्कॉट मॉरीसन चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री का पद ग्रहण करेंगे उन्हें भी ऐसे शिखर सम्मेलन में भारत के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए एक नई इबादत लिखनी होगी।

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