दिल्ली में छलका महिला शिक्षामित्रों का दर्द..

डीएन ब्यूरो

यूपी से दिल्ली पहुंची महिला शिक्षामित्रों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान अपनी कई भावात्मक और दर्दभरी कहानी डाइनामाइट न्यूज़ के साथ साझा की..

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश से हजारों की तादाद में दिल्ली पहुंचे शिक्षामित्रों के आंदोलन के कई रंग-रूप देखने को भी मिले। महिला शिक्षामित्रों ने डाइनामाइट न्यूज़ के साथ अपना दर्द साझा करते हुये सरकार पर ‘बेवफाई’ करने का आरोप लगाया है। महिला शिक्षामित्रों का कहना है कि वह अपने जीवन-यापन के बुनियादी हक को पाने के लिये कोई भी जोखिम उठाने को तैयार हैं। दूसरी तरफ पुरूष शिक्षामित्रों ने भी सरकार पर जमकर निशाना साधा और कई वाजिव सवाल खड़े किये। 

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गर्भवती शिक्षामित्र भी पहुंची दिल्ली

लखनऊ से आई एक महिला शिक्षामित्र ने डाइनामाइट न्यूज़ को बताया कि उनके साथ कई गर्भवती शिक्षामित्र भी इस आंदोलन में शामिल होने के लिये दिल्ली पहुंची हैं। नौकरी खतरे में पड़ जाने के बाद शिक्षामित्रों को हर जोखिम कम लग रहा है। इसके पीछे शिक्षामित्र का तर्क है कि रोजी-रोटी के बिना जीवन-यापन संभव नहीं है। इसलिये जीवन के इस बुनियादी हक को पाने के लिये वह कोई भी जोखिम उठाने और इसकी कीमत चुकाने को तैयार हैं।

 

 

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उम्र के इस पड़ाव पर कहां जायें?

सुल्तानपुर से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिये आई एक महिला शिक्षामित्र ने डाइनामाइट न्यूज़ से बात करते हुये सवाल उठाया कि 50-55 की उम्र में अब भला वो अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे करेंगे? जबकि वह कई पिछले वर्षों से राज्य की शिक्षा व्यवस्था का एक अहम हिस्सा रह चुकी हैं। उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि उम्र के इस पड़ाव पर उनको नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। यह केवल एक शिक्षामित्र की नहीं बल्कि राज्य के हजारों शिक्षामित्रों और उनके की कहानी है।

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परिवार का भरण-पोषण भी खतरे में

कानपुर से आई एक अन्य महिला शिक्षामित्र ने कहा कि नौकरी भले ही उनकी खतरे में पड़ी हो, लेकिन सच यह है कि इस कारण उनके पूरे परिवार भरण-पोषण भी खतरे में पड़ गया है। इससे राज्य के लाखों परिवारों पर संकट आन पड़ा है। शिक्षामित्र का कहना है कि सरकार ऐसे परिवारों को ध्यान में रखते हुये समस्या का कोई उचित समाधान निकाले, नहीं तो यह समस्या विकराल रूप धारण कर सकती है।

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