मकर संक्रांति 2019: जानिए क्या है मकर संक्रांति और क्या कुछ खास होता है इस दिन

डीएन ब्यूरो

वैसे तो आम तौर पर मकर संक्रांति लोहड़ी के एक दिन बाद 14 जनवरी को मनाई जाती है, लेकिन इस वर्ष यह 15 जनवरी को मनाई जाएगी। डाइनामाइट न्यूज की रिपोर्ट में जानिए क्या है मकर संक्रांति और क्या मायने हैं इस दिन के..

मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है
मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है

नई दिल्ली: मकर संक्रांति हर वर्ष 14 जनवरी को मनाई जाती है लेकिन इस वर्ष यह 14 जनवरी की बजाए 15 जनवरी को पड़ रही है, इसलिए कुंभ मेले की शुरुआत और पहला स्नान भी 15 जनवरी से शुरु होगा।

क्या है मकर संक्रांति

मकर संक्रांति हिंदुओं का मुख्य त्यौहार है जो पूरे भारत और नेपाल में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है। सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि के जाने को ही संक्रांति कहा जाता है। एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति के बीच के समय को सौर मास कहा जाता है। एक जगह से दूसरी जगह जाना या दोस्तों और मित्रों से मिलने को ही संक्रांति कहते हैं।

मकर संक्रांति का महत्व 

शास्त्रों के अनुसार दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि या नकारात्माकता का प्रतीक और उत्तरायण को देवताओं का दिन अथवा सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। संक्रांति के दौरान पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर मुड़ा होता है। अत: इस दिन को बेहद शुभ माना जाता है। इसलिए शादी और अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत मकर संक्रांति के दिन से ही होती है।

यदि इसके ऐतिहासिक महत्व की बात की जाए तो ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शनि (जिन्हें मकर राशि का स्वामी माना जाता है) से स्वयं मिलने गए थे। इसलिए इस दिन को शुभ मानते हुए लोग अपने रिश्तेदारों और मित्रों से मिलने जाते हैं। 

वहीं एक अन्य व्याख्या के अनुसार महाभारत काल में भीष्म पितामाह ने देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति का दिन चुना था। मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिल गई थीं। 

मकर संक्रांति के दिन बच्चे पतंग उड़ाते हैं
मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाते बच्चे

शुभ मुहूर्त तथा पूजा विधि 

पुण्य काल मुहूर्त - 07:14 से 12:36 तक (कुल समय - 5 घंटे 21 मिनट)
महापुण्य काल मुहूर्त - 07:14 से 09:01 तक (कुल समय - 1 घंटे 47 मिनट)  

मकर संक्रांति को देश के सभी भागों में अलग-अलग रूप में मनाया जाता है, इसलिए पूजा विधियाँ भिन्न-भिन्न हो सकती हैं। लेकिन कुछ बातें हर जगह समान होती हैं। जैसे कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है। लेकिन घर पर भी स्नान करके पूजा की जा सकती है। इस दिन सूर्य देवता की पूजा की जाती है तथा पितरों का ध्यान किया जाता है व उन्हें तर्पण दिया जाता है।

इस दिन सूर्य देवता की पूजा की जाती है


विदेशों में भी धूम-धाम से मनाई जाती है मकर संक्रांति

भारत समेत विश्व के कई अन्य देशों में भी मकर संक्रांति बड़े धूम-धाम से मनाई जाती है। नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार, बांग्लादेश, थाइलैण्ड लाओस और कंबोडिया में इस त्यौहार को अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है।

भारत की तरह विश्व के अन्य देशों में भी इसे अलग-अलग नामों से संबोधित किया जाता है। नेपाल में इसे माघे संक्रांति, बांग्लादेश में पौष संक्रांति, थाइलैण्ड में सोंगकरन, लाओस में पी मा लाओ, म्यांमार में थिंयान, कंबोडिया में मोहा संगक्रान और श्री लंका में पोंगल कहा जाता है।

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