Gudi Padwa 2025: महाराष्ट्र में प्रसिद्ध क्यों है गुड़ी पड़वा ? जानें कब मनाया जाएगा ये त्योहार और क्या इसका शुभ मुहूर्त
महाराष्ट्र का प्रसिद्ध पर्व गुड़ी पड़वा जल्द आने वाला है, जिसके लिए मराठी समुदाय ने तैयारियां भी कर ली है। कब मनाया जाएगा ये त्योहार ? पढ़िये डाइनामाइट न्यूज़ की रिपोर्ट में

नई दिल्लीः गुड़ी पड़वा महाराष्ट्र का सबसे प्रसिद्ध त्योहार है जो राज्य में नव वर्ष का प्रतीक है। इस त्योहार को कर्नाटक, तेलंगाना, और आंध्र प्रदेश में भी बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। गुड़ी पड़वा के दिन घरों में ध्वज फहराया जाता है। इसको लेकर ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
डाइनामाइट न्यूज़ के संवाददाता के अनुसार, गुड़ी पड़वा के दिन महाराष्ट्र में पारंपरिक व्यंजन बनाया जाता है और अपने परिवार के साथ इस पर्व को हर्षोउल्लास से मनाया जाता है। आइए फिर आपको बताते हैं कि गुड़ी पड़वा कब है और इसका शुभ मुहूर्त क्या है। यहीं नहीं हम आपको यह भी बताएंगे कि इस पर्व को मनाने का महत्व क्या है।
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कब है गुड़ी पड़वा?
पंचांग के अनुसार, गुड़ी पड़वा हर साल चैत्र माह शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है, जो मराठी में नए साल की शुरूआत मानी जाती है। इस वर्ष यह पर्व 30 मार्च को मनाया जाएगा, जिसकी तैयारी शुरू भी हो चुकी है। इस वर्ष गुड़ी पड़वा और चैत्र नवरात्रि एक दिन को पड़ रहे हैं, इसलिए ये दिन बेहद शुभ माना जा रहा है।
गुड़ी पड़वा का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, गुड़ी पड़वा की शुरूआत 29 मार्च शाम 4 बजकर 27 मिनट से होगा और समाप्त 30 मार्च को दोपहर 12 बजकर 49 मिनट पर होगा। हिंदू धर्म में उदय तिथि को महत्व दिया जाता है, ऐसे में गुड़ी पड़वा 30 मार्च को मनाया जाएगा।
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गुड़ी पड़वा का महत्व
गुड़ी पड़वा दो शब्दों से मिलकर बना है गुड़ी और पड़वा, जिसमें गुड़ी का अर्थ झंडा और पड़वा का अर्थ चंद्र पखवाड़े का पहला दिन है। इस त्योहार को हिंदू नववर्ष का शुभारंभ और विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस त्योहार को मनाने को लेकर कहा जाता है कि इस दिन ब्रह्मा जी ने ब्रह्मांड का निर्माण किया था। वहीं, महाराष्ट्र में इससे मनाने का मुख्य कारण मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज की युद्ध में विजय होने से है।
कैसे मनाया जाता है ये त्योहार ?
इस दिन मराठी लोग घरों में रंग-बिरंगे गुड़ी लगाते हैं। मराठी गुड़ी में बांस की लकड़ी के ऊपर चांदी, तांबे या पीतल के कलश का उल्टा करके उसमें केसरिया रंग का पताका लगाकर उसे नीम की पत्ती, आम की पत्ती और फूलों से सजाते हैं। फिर घर के सबसे ऊंचे स्थान पर लगाते हैं। इसके अलावा वह इस दिन स्वादिष्ट व्यंजन बनाकर एक साथ खाते हैं।