कानपुर: छत से टपकते पानी और सीलन में पढ़ने को मजबूर बच्चे

डीएन संवाददाता

कानपुर के बिरहानारोड स्थित एक प्राइमरी स्कूल में छत से टपकते पानी और सीलन में बच्चे और शिक्षक अपनी जान जोखिम में डालते हुए पढ़ने और पढ़ाने को मजबूर हैं।

छत से टपकते पानी और सीलन में पढ़ने को मजबूर बच्चे
छत से टपकते पानी और सीलन में पढ़ने को मजबूर बच्चे

कानपुर: बिरहानारोड स्थित एक प्राइमरी विद्यालय के बच्चे और शिक्षकों को बारिश के दिनों में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के दिनों में इस स्कूल की छत से पानी टपकता है इसके बावजूद बच्चे और शिक्षक अपनी जान जोखिम में डालते हुए पढ़ने और पढ़ाने को मजबूर हैं।

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टीचर्स और बच्चों को हर पल बारिश का डर बना रहता है कि जर्जर हालत में बनी ये छत कहीं गिर न पड़े। लेकिन किसी ने भी इस मामले को गंभीरता से नही लिया।

छतों से टपकता है पानी

बिरहाना रोड पर स्थित रोटी गोदाम के पास करीब 40 साल पुराना प्राथमिक विद्यालय है। हालत यह है यहां कि बारिश में न तो बच्चे पढ़ पाते हैं, न ही टीचर पढ़ा पाते है। इसका कारण स्कूल की छत से टपकता हुआ पानी है, जो बारिश के मौसम में बच्चों और टीचरों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।

कई वर्षों पुरानी इस पाठशाला की बिल्डिंग भी काफी पुरानी है। स्कूल में करीब 30 बच्चे पढ़ते है जबकि इस स्कूल में तीन टीचर भी है। वैसे तो पाठशाला में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन जब बारिश होती है तो बारिश का पानी छतों से टपकता है जिसकी वजह से बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते। वहीं टीचर को भी पढ़ाने में काफी दिक्क़तें होती है। मज़बूरी में टीचर किसी तरह बच्चों को पढ़ाने के लिए मजबूर है।

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क्या कहना है अध्यापक का

स्कूल की प्रधानाचार्या ज्योत्सना तिवारी का कहना है कि मैं पिछले कुछ दिनों पहले यहां आयी हूँ। यह स्कूल करीब चालीस वर्ष पुराना है, जब बारिश होती है तो दीवारों पर सीलन बनी रहती है और दीवारों का पानी कक्षा में टपकता रहता है। इसको कोई भी देखने वाला नहीं है। हम लोगों के पहले जो टीचर थे उन्होंने भी इसकी शिकायत बीएसए से की लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। स्कूल में अक्सर डर लगा रहता है कि कही जर्जर हालत में ये दीवारे कोई मुसीबत न बन जाये।

बच्चे भी ऐसी परिस्थितियों में पढ़ने को मजबूर है। यह इमारत जर्जर हालत में है और कभी भी कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।  बच्चों ने बताया कि पढ़ने में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। छत की दीवार से पानी टपकता है। किताबें और कपड़े भी गीले हो जाते हैं। जिससे पढ़ने में काफी परेशानियां होती है। कोई इसे देखने वाला नही। बीएसए इससे बेफिक्र है और इसकी मरम्मत नहीं करा रहे हैं।

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