धूमधाम से देशभर में मनाया जा रहा है बैसाखी का त्योहार, जानिए कुछ ख़ास बातें..

बैसाखी का त्योहार पूरे देशभर में उत्साह पूर्वक मनाया जा रहा है। इस त्योहार को फसलों और उमंगो का त्योहार माना जाता है। भारतीय संस्कृति की मानें तो ये त्योहार भी ग्रह-नक्षत्रों, वातावरण, ऐतिहासिक महत्व और खेती से जुड़ा हुआ है।

Updated : 13 April 2017, 1:37 PM IST
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नई दिल्ली: बैसाखी का त्योहार पूरे देशभर में धूम-धाम से मनाया जा रहा है। बैसाखी को वैसाखी के नाम से भी जाना जाता है। इस त्योहार का सिखों के लिए बहुत ही महत्व होता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार यह हर साल 13 या 14 अप्रैल को मनाया जाता है। 13 अप्रैल 1699 के दिन सिख पंथ के 10वें गुरू श्री गुरू गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी  इसके साथ ही इस दिन को मनाना शुरू किया गया था।

क्यों मनाते है बैसाखी त्योहार?
हमारे देश में महीनों के नाम नक्षत्रों पर रखे गए है। ऐसा कहा जाता है कि बैसाखी के समय आकाश में विखाशा नक्षत्र होता है। विशाखा नक्षत्र पूर्णिमा में होने के कारण इस माह को बैसाखी कहते है। यानि कि बैसाखी उत्सव तब मनाया जाता है जब सूर्य मेष राशि में प्रेवश करता है। हालांकि इस बार बैसाखी 13 अप्रैल को है लेकिन कभी-कभी ये 14 तारीख को भी पड़ती है। कहा जाता है कि बैसाखी एक तरह से गर्मी का आगाज है। सूर्य की गर्म किरणों से रबी की फसल पक जाती है तो वहीं खरीफ फसलों का मौसम शुरु हो जाता है।

खालास पंथ की रखी गई थी नींव
ऐसा कहा जाता है कि सिखों के 10वें गुरु गोबिन्द सिंह ने बैसाखी के दिन ही आनंदपुर साहिब में साल 1699 में खालसा पंथ की नींव रखी थी। खालसा शब्द का अर्थ शुद्ध और पावन होता है। इसी वजह से बैसाखी का त्योहार सूर्य की तिथि के अनुसार ही मनाया जाता है। माना जाता है कि खालसा पंथ की स्थापना के पीछे गुरु गोबिन्द सिंह का मुख्य उद्देश्य लोगों को तत्कालनी मुगल शासकों के अत्याचारों से मुक्त कर धार्मिक , नैतिक और व्यवहारिक जीवन को अच्छा बनाना था।

बैसाखी से शुरु होती है गेहूं की कटाई
बैसाखी के दिन से ही पंजाब में गेहूं की कटाई शुरु हो जाती है। किसान गेहूं को किसी सोने से कम नहीं समझते। इस दिन कई जगहों पर लंगर भी लगाया जाता है। इसके साथ ही लोग ढोल नगाड़े की धुनों पर नाचते झूमते दिखाई देते है।

 

Published : 
  • 13 April 2017, 1:37 PM IST

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