
बकरों की मण्डी
महराजगंज: बकरीद पर्व के नजदीक आते ही बकरे के मंडियों में खरीददारों की खासी चहल पहल देखने को मिल रही। पूर्वांचल के महराजगंज के कोल्हुई में लगने वाला बकरा मंडी पूरे पूर्वांचल का ध्यान अपनी ओर खींच लेता हैं।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार पूर्वांचल के सबसे बड़ी बकरी की मण्डी के रूप मे जाने जाना वाला यह मंडी वर्षो पुराना हैं। भारत नेपाल सीमा के नजदीक होने के नाते यहां पर लोग पड़ोसी देश नेपाल, सीमावर्ती जिला सिद्धार्थनगर, संतकबीर नगर, बस्ती, के लोग कुर्बानी के लिए बकरे खरीदने के लिए आते हैं। लोगो का कहना है साप्ताहिक बाजार में कई लाखों के बकरे की खरीद होती है।
सुबह से ही सज जाती हैं मंडी
सुबह 5 बजे से ही बकरा मंडी सज जाती है। करीब 11 बजे दिन तक खरीद फरोख्त चलता है। इस बार बाजार में करीब दस हजार रुपये से लेकर 60-70 हजार रुपये तक के बकरे मिलते हैं।
इस नस्ल की बकरो की डिमांड
बाजार में देसी, सिरोही, जमुनापरी, काल्पी आदि नस्ल के बकरे बिकने के लिए आ रहे हैं। जिनकी डिमांड खरीददारों में रहती हैं। ईद-उल-अजहा (बकरीद) 7 जून को अदब और अहतराम के साथ मनाई जाएगी। अल्लाह के नाम पर कुर्बानी देने के लिए लोगों ने तैयारी भी शुरू कर दी है।
कब है बकरीद?
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, इस साल बकरीद का पर्व (बकरा ईद) 6 या 7 जून, 2025 को मनाया जाएगा। हालांकि इसकी तारीख पूरी तरह से चांद दिखने के बाद ही आधिकारिक रूप से तय की जाती है। इसलिए पुष्टि के लिए चांद दिखने का इंतजार करना होगा।
क्यों मनाई जाती है बकरीद?
बकरीद पैगंबर इब्राहिम की अल्लाह के प्रति अटूट समर्पण की याद दिलाता है। अल्लाह ने इब्राहिम को अपने सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी देने का हुक्म दिया था। इब्राहिम ने अल्लाह के हुक्म को मानते हुए अपने बेटे की कुर्बानी देने का फैसला किया। जब वह ऐसा करने ही वाले थे, तो अल्लाह ने उन्हें ऐसा करने से रोक लिया था और उसकी जगह एक बकरे की कुर्बानी हो चुकी थी। तभी से कुर्बानी की परंपरा शुरू हुई और हर साल ईद उल अजहा पर कुर्बानी दी जाती है।
बकरीद केवल कुर्बानी का त्योहार नहीं है, बल्कि यह त्याग, बलिदान, और अल्लाह के प्रति समर्पण का प्रतीक है। इस दिन मुसलमान सुबह की नमाज अदा करते हैं और फिर जानवरों की कुर्बानी करते हैं।
Location : Maharajganj
Published : 23 May 2025, 3:55 PM IST
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