स्वामी निखिलानंद के विचार, भगवान को समझना है तो रखे ऐसी सोच
स्वामी निखिलानंद जी महाराज ने साप्ताहिक धार्मिक कार्यक्रम में दूसरे दिन कहा कि भौतिक प्राणियों के लिए अपनी इंद्रियों, मन या बुद्धि से भगवान को समझना असंभव है

रायबरेली: अपने ज्ञानवर्धक व्याख्यान माला के दूसरे दिन स्वामी निखिलानंद जी ने श्रोताओं को आध्यात्मिक ज्ञान के गूढ़ पहलुओं से परिचित कराया तथा भौतिक बुद्धि की सीमाओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि इस ब्रह्मांड की संरचना एक पदानुक्रम में विभाजित है, जिसमें सबसे नीचे भौतिक इंद्रियां आती हैं।
डाइनामाइट न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद मन, बुद्धि, आत्मा, माया (भ्रम) तथा सबसे ऊपर ईश्वर है। स्वामी जी ने स्पष्ट किया कि "भौतिक इंद्रियों, मन या बुद्धि के बल पर ईश्वर को जानना संभव नहीं है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि माया के प्रभाव में रहने वाले सभी प्राणी - यहां तक कि स्वर्ग के देवता भी - अपने बल पर ईश्वर को नहीं समझ सकते। उदाहरण देते हुए स्वामी निखिलानंद जी ने बताया कि ब्रह्मा जी जैसे सृष्टिकर्ता भी ईश्वर की कृपा से ही उन्हें जान सके।
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उन्होंने कहा, "सभी स्वर्गीय प्राणी ईश्वर की शक्ति से ही कार्य करते हैं, उनके पास अपनी कोई शक्ति नहीं है।" गहन आध्यात्मिक बातों से अभिभूत श्रोता अब इस श्रृंखला के अगले प्रवचनों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। आज स्वामी निखिलानंद जी बताएंगे कि ईश्वर को देखने और समझने के लिए किस तरह से ईश्वरीय कृपा प्राप्त की जा सकती है।
जगद्गुरु कृपालु जी महाराज की शिक्षाओं पर आधारित यह व्याख्यानमाला भक्तों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक साबित हो रही है, जहां वे स्वयं को ईश्वरीय ज्ञान में डुबो रहे हैं। कृपालु जी महाराज के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में संस्कृत, हिंदी और सभी शास्त्रों का गहन अध्ययन करने वाले स्वामी निखिलानंद 25 मार्च तक इस व्याख्यानमाला को जारी रखेंगे।
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