सुप्रीम कोर्ट ने स्थायी समिति की पॉवर ट्रांसफर करने की सुनवाई की स्थगित
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली की महापौर शैली ओबेरॉय की उस याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी, जिसमें अनुरोध किया गया है कि स्थायी समिति गठित होने तक एमसीडी को इसके कार्य करने की अनुमति दी जाए। पढ़िये डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली की महापौर शैली ओबेरॉय की उस याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी, जिसमें अनुरोध किया गया है कि स्थायी समिति गठित होने तक एमसीडी को इसके कार्य करने की अनुमति दी जाए।
डाइनामाइट न्यूज संवाददाता के अनुसार आम आदमी पार्टी (आप) की नेता ओबेरॉय की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ को बताया कि इससे पहले एक अलग याचिका पर फैसला पिछले साल मई में सुरक्षित रख लिया गया था। इसके बाद अदालत ने महापौर की याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह के लिए टाल दी।
यह भी पढ़ें: चंडीगढ़ मेयर चुनाव पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, दिया ये फैसला
प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा, “सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित की जाती है।”
यह भी पढ़ें |
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने विभिन्न उच्च न्यायालयों के बड़ी संख्या में जजों के तबादले की सिफारिश की, जानिये पूरा अपडेट
उल्लेखनीय है कि 17 मई, 2023 को प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली सरकार द्वारा दायर एक अलग याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसमें सदस्यों को मनोनीत करने की उपराज्यपाल की शक्ति को चुनौती दी गई थी।
यह भी पढ़ें: उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली हरियाणा की याचिका पर जवाब दे केंद्र
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) में 250 निर्वाचित और 10 मनोनीत सदस्य हैं। दिल्ली सरकार ने आरोप लगाया था कि उपराज्यपाल ने उसकी सलाह के बिना 10 सदस्यों को मनोनीत किया था।
महापौर ने नयी याचिका में कहा कि वह नहीं चाहतीं कि मनोनीत सदस्य एमसीडी की स्थायी समितियों के निर्वाचक मंडल का हिस्सा बनें।
यह भी पढ़ें |
सुप्रीम कोर्ट से संजय सिंह को बड़ा झटका, जानिए पूरा मामला
महापौर ने स्थायी समिति का गठन होने तक इसके कार्य एमसीडी को सौंपने का अनुरोध किया है।
संक्षिप्त सुनवाई के दौरान सिंघवी ने कहा कि स्थायी समिति सभी महत्वपूर्ण कार्य करती है और मध्याह्न भोजन योजना समेत उन मामलों पर फैसले लेती है, जिनके लिए पांच करोड़ रुपये और उससे अधिक के बजट की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि स्थायी समिति का गठन नहीं हो पाया है और इसका एक कारण यह हो सकता है कि शीर्ष अदालत ने पिछली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख रखा है।