Satpal Sangwan: हरियाणा के पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान की राजनीति में कैसे हुई एंट्री

डीएन ब्यूरो

हरियाणा की राजनीति में एक बड़ा नाम रहे पूर्व कैबिनेट मंत्री सतपाल सांगवान का रविवार को निधन हो गया है। पढ़िए डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट

सतपाल सांगवान ने दुनिया को कहा अलविदा
सतपाल सांगवान ने दुनिया को कहा अलविदा


चंडीगढ़: हरियाणा के पूर्व कैबिनेट मंत्री सतपाल सांगवान का आज सोमवार तड़के गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन से राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार  सतपाल सांगवान बीते कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे और गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती थे। उन्होंने आज तड़के करीब 3 बजे अंतिम सांस ली। वे 83 साल के थे। 

सोमवार सुबह उनका पार्थिव शरीर चरखी दादरी में उनके निवास स्थान पर पहुंचा और अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है। दादरी जिले के उनके पैतृक गांव चंदेनी में दोपहर बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। पूर्व सीएम बंशीलाल उनको बुलडोजर के नाम से पुकारते थे।

सीएम सैनी ने अस्पताल में की मुलाकात

दिवंगत सतपाल सांगवान दादरी से बीजेपी विधायक सुनील सांगवान के पिता है। रविवार को निधन के कुछ घंटे समय हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी भी उनसे मिलने मेदांता पहुंचे थे।

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सांगवान चरखी दादरी से हजकां की टिकट पर 2009 में दोबारा विधायक बने और भूपेंद्र हुड्डा सरकार में सहकारिता मंत्री बने। 2014 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर हार गए और 2019 के चुनाव में कांग्रेस की टिकट कटने पर जजपा से विधानसभा का चुनाव लड़ा।

दिवंगत सतपाल सांगवान अपने बेटे सुनील सांगवान के साथ 

इस चुनाव में सतपाल सांगवान दूसरे स्थान पर रहे थे। किसान आंदोलन के दौरान सांगवान ने जजपा को अलविदा कह दिया था। बाद में कार्यकर्ता सम्मेलन कर भाजपा में शामिल हो गए थे।

बता दें कि 7 जनवरी 1942 को गाव चंदेनी में किसान मांगेराम के घर सतपाल सांगवान का जन्म हुआ था। किसान घर में पैदा होने के बाद बीएससी तक शिक्षा ग्रहण की और सरकारी अध्यापक भी लगे। बाद में वे दूरसंचार विभाग में एसडीओ के पद पर नौकरी मिल गई।

कैसे आए राजनीति में 

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विधायक बनने से पहले टेलीफोन एक्सचेंज में एसडीओ के पद पर कार्यरत थे। नौकरी से वीआरएस दिलवा कर पूर्व सीएम चौधरी बंसीलाल इनको राजनीति में लाए थे।

पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान ने अपने जीवन में चरखी दादरी से 6 बार विधानसभा चुनाव लड़े। हविपा की टिकट पर पहली बार 1996 में चरखी दादरी के विधायक बने थे।

साल 2024 में सतपाल सांगवान बीजेपी में शामिल हो गए। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल की उपस्थिति में उन्होंने बीजेपी का दामन थामा था। इसके बाद उन्होंने ज्यादा उम्र होने के कारण अपने बेटे को चुनाव लड़ाया था। उनके बेटे ने विधानसभा चुनाव 2024 में बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की और विधायक बन गए।










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