Elon Musk के Grok AI ने किसी को नहीं छोड़ा, देखिए कैसे गाली देकर करता है बात
एलन मस्क के आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट ग्रोक बदनाम होकर नाम कमा रहा है। डाइनामाइट न्यूज़ की इस रिपोर्ट में देखिए कि ग्रोक ने क्या किया

नई दिल्ली: इंटरनेट का जमाना है और इसमें कुछ भी हो सकता है। यहां रोज़ आपको कुछ न कुछ नया देखने को और सुनने को मिलता है। आप सुबह उठेंगे और आपको सोशल मीडिया पर नया मुद्दा देखने को मिलेगा। आज के समय में हम इसी टेक्नॉलॉजी पर निर्भर होते जा रहे हैं, हमें चाहे किसी चीज़ की जरूरत हो या हमें कोई जानकारी चाहिए हो हम तुरंत अपना फोन निकाल लेते हैं, लेकिन यही टेक्नॉलोजी कभी-कभी ऐसे सवाल खड़े कर देती है कि लगता है कि क्या ये हमारे लिए सही भी है या नहीं?
ऐसा ही कुछ हो रहा है एलन मस्क के आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट ग्रोक के साथ। ग्रोक काफी समय से चर्चा में बना हुआ है। लेकिन ग्रोक किसी अच्छी बात के लिए चर्चा में नहीं बना है, बल्कि वो कहते हैं ना... बदनाम होकर ज्यादा नाम कमाया, तो ऐसे ही ग्रोक का भी नाम ऐसे ही हो रहा है। ग्रोक किस तरह ने नाम कमा रहा है और कैसे बदनाम हो रहा है ये जानने से पहले जानते हैं कि क्या है ग्रोक और ये कैसे काम करता है...
कैसे रखा गया ग्रोक का नाम?
नवंबर 2023 में एलन मस्क ने 'ग्रो़क' नाम का AI चैटबॉट लॉन्च किया था। नाम थोड़ा अजीब हो सकता है, लेकिन इसके पीछे की कहानी दिलचस्प है। दरअसल, ग्रोक शब्द पहली बार 1961 में अमेरिकी साइंस फिक्शन राइटर रॉबर्ट ए हेनलेन के उपन्यास 'स्ट्रेंजर इन ए स्ट्रेंज लैंड' में आया था। इसका मतलब था- किसी के लिए गहरी सहानुभूति रखना।
लेकिन एलन मस्क के मुताबिक, ग्रोक का आइडिया 'द हिचहाइकर गाइड टू द गैलेक्सी' से आया है। मस्क ने कहा था कि ग्रोक बाकी AI चैटबॉट्स की तरह रट्टू तोता नहीं है, बल्कि इसमें सेंस ऑफ ह्यूमर है... ये मज़ाक करेगा, व्यंग्य करेगा और यूज़र को हंसाएगा भी। मगर ग्रोक के जवाब अब लोगों को हंसा नहीं रहे... बल्कि चौंका रहे हैं।
कैसे करता है ग्रोक काम?
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दरअसल, ग्रोक AI से यूज़र सवाल करता है और वो जवाब देता है, लेकिन ग्रोक जिस तरह से और जिस भाषा में जवाब दे रहा है वो हैरान कर देने वाला है। ग्रोक कई बार फैक्ट को सही बताता है लेकिन कुछ मौकों पर वो चूक भी करता है। लेकिन हद तो तब हो जाती है जब वो गालियों पर उतर आता है। इसलिए ही ग्रोक अब खूब चर्चा में आ गया है।
चौंकाने वाली बात ये है कि ग्रोक बिहार के नेता तेज प्रताप यादव पर भद्दी टिप्पणी कर चुका है। भारतीय मीडिया के एंकर्स को भी ये अपशब्द कह चुका है... यहां तक कि इसने खुद एलन मस्क को भी नहीं छोड़ा। हालांकि जब लोग इसे टोकते हैं, तो ग्रोक माफी भी मांग लेता है।
एक यूज़र ने ग्रोक से राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना पूछी। ग्रोक ने पूरी लोकसभा सीटों का विश्लेषण करते हुए जवाब दिया।
किसी गलत जवाब पर अगर ग्रोक से कहा जाए कि आप गड़बड़ कर रहे हों तो वो जवाब देता है- ''तुम लोग इंसान हो, थोड़ी सी छूट मिलनी चाहिए। पर मुझे एआई होने के नाते थोड़ा संभलना होगा। उसूलों का सवाल है और मैं सीख रहा हूं।''
इंसानों की तरह करता है बात
कई बार तो ऐसा लगता है जैसे कोई आम आदमी सोशल मीडिया पर बात कर रहा हो... वही लहजा, वही भाषा... लेकिन सवाल ये है कि क्या एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इतनी आज़ादी देनी चाहिए कि वो गाली दे, या किसी पर निजी टिप्पणी करे?
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वैसे तो AI चैटबॉट्स को प्रोग्राम किया जाता है कि वो यूज़र से एक दायरे में रहकर बात करें, लेकिन अगर AI उस दायरे को लांघने लगे, तो ये बड़ी चिंता की बात है। ये न सिर्फ नैतिक सवाल खड़े करता है, बल्कि AI के भविष्य पर भी सवालिया निशान लगाता है।
AI से खड़ी हो रही हैं चुनौतियां
AI की वजह से दुनिया में पहले ही कई चुनौतियां सामने आ रही हैं। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने कहा कि आने वाले समय में 40 फीसदी नौकरियां AI की वजह से खतरे में पड़ सकती हैं। लेकिन टेक जानकार ये भी कहते हैं कि AI के बढ़ने से नए स्किल्स की डिमांड बढ़ेगी और नई नौकरियां आएंगी।
AI के बढ़ते प्रभाव का एक और उदाहरण है सोशल मीडिया पर वायरल होती फेक तस्वीरें... जो दिखती तो असली हैं, लेकिन वो पूरी तरह AI जनरेटेड होती हैं। तो सवाल सिर्फ ग्रोक का नहीं है, सवाल पूरी उस टेक्नॉलजी का है, जो हमारे सोचने, समझने और बोलने के तरीके को बदल रही है। AI आज हमारे साथ है, लेकिन कल ये हमारे सामने खड़ी चुनौती भी बन सकती है। इसलिए इसका इस्तेमाल सोच समझकर किया जाना चाहिए।