कोरोना संकट पर विशेष पड़ताल: महानगरों का वायरस अब ले रहा है गांवों को अपनी चपेट में!

सुभाष रतूड़ी

अभी तक बड़े शहरों को खतरे में डालने वाले कोरोना ने अब देश के ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से पांव पसारने शुरू कर दिये हैं। प्रवासियों के लौटने के साथ कोरोना संक्रमण के मामले ग्रामीण भारत में तेजी से बढते जा रहे हैं। यूपी की स्थित चिंताजनक बनती जा रही हैं। पढिये, डाइनामाइट न्यूज की स्पेशल रिपोर्ट

गांव लौटते प्रवासी (फाइल फोटो)
गांव लौटते प्रवासी (फाइल फोटो)

नई दिल्ली/लखनऊ: अब तक दिल्ली-मुबंई जैसे देश के बड़े महानगर ही कोरोना संकट से सबसे ज्यादा जूझ रहे थे, लेकिन कोरोना वायरस अब देश के ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेजी से पांव फैला रहा है। देश के सुदूरवर्ती ग्रामीण अंचलों में कोरोना का तेज प्रसार शहरों की अपेक्षा ज्यादा चिंताजनक है। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में भी यह संकट लगातार बढता जा रहा है। यद्यपि सरकार द्वारा कोरोना संक्रमण को रोकने के लिये सभी तरह के अनिवार्य उपाय किये जा रहे हैं। लेकिन प्रवासियों के लगातार गांव लौटने के कारण सरकार के लिये भी स्थिति पर नियंत्रण पाना टेडी खीर साबित हो रहा है। भारत में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़कर एक लाख के आंकड़े पार कर चुके है। ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण की संख्या में भी पहले की अपेक्षा ज्यादा बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है और इसमें भी प्रवासियों की संख्या ज्यादा है। 

20 लाख से अधिक प्रवासी लौटे यूपी, संक्रमण का जोखिम ज्यादा

सरकार द्वारा जारी आकड़ों के मुताबिक बीते 19 दिनों में भारतीय रेलवे ने श्रमिक स्पेशल ट्रेन के ज़रिए लगभग 21.5 लाख से अधिक प्रवासियों को उनके गृह-राज्य पहुंचाया है। इसके अलावा गैर पंजीकृत तरीके और अन्य माध्यमों मसलन ट्रक, टैंपो, साइकिल, रिक्शा, पैदल गांव जाने वाले लोगों की संख्या अलग है। दोनो माध्यमों से घर लौटने वाले प्रवासियों की कुल संख्या अनुमान के मुताबिक 30-35 लाख के आसपास हो सकती है। रिपोर्टों के मुताबिक कोरोना काल में लगभग 20 लाख प्रवासी अब तक अकेले उत्तर प्रदेश लौटे हैं। यूपी के अलावा घर-गांव लौटने वालों में सबसे ज्यादा संख्या बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, उत्तराखंड जैसे उन राज्यों के प्रवासियों की है, जहां से अब तक सबसे ज्यादा पलायन हुआ। सरकार द्वारा अब जैसे-जैसे यातायात और आवागमन की सुविधाएं बढायी जा रही है, उसी अनुपात में गांव लौटने वाले प्रवासियों की संख्या भी बढ रही है। जिससे कोरोना संक्रमण का जोखिम भी बढेगा।   

70 फीसदी मामले प्रवासियों से जुड़े हुए

अब तक के सामने आये आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण के कुल मामलों में से लगभग 70 फीसदी मामले अकेले प्रवासियों से जुड़े हुए है। प्रवासियों के तेजी से गांवों की ओर लौटने के अनुपात में ही कोरोना संक्रमण के मामलों का भी लगातार बढता जा रहा है। जिसका मतलब है कि राज्य में प्रवासियों के रिवर्स माइग्रेशन की संख्या बढने के साथ ही कोरोना पॉजीटिव केसों की संख्या भी बढ रही है। क्योंकि यूपी देश के उन चुनिंदा राज्यों में बिहार के बाद दूसरे नंबर पर आता है, जहां से रोजगार और परिवार के भरण-पोषण के लिये लोगों ने सबसे ज्यादा पलायन किया।

अब तक अपने गांव वापस लौटे प्रवासियों की संख्या शहरों में रोजगार के लिये पलायन करने वाले लोगों की वास्तविक संख्या से बेहद कम है। यदि पलायन करने वाले 60-70 फीसदी प्रवासी भी कोरोना काल में वापस गांव लौटते हैं तो यह राज्यों समेत देश के लिये अत्यंत चिंताजनक बात हो सकती है। क्योंकि आने वाले दिनों में इसी अनुपात में कोरोना जोखिम भी गांवों में बढ सकता है।

उत्तर प्रदेश, बिहार से सबसे ज्यादा पलायन

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, अकेले उत्तर प्रदेश एवं बिहार से पलायन करने वालों की संख्या देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक है। इन दो राज्यों से अकेले लगभग 20.9 मिलियन लोग पलायन कर चुके थे। पलायन का यह आँकड़ा देश में होने वाले कुल अंतर-राज्यीय पलायन का 37 प्रतिशत है। आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश और बिहार ऐसे राज्य हैं, जहां सबसे अधिक लोग गांवों में रहते हैं, यह संख्या क्रमश 18.6 और 11.1 फीसदी थी। सर्वाधिक पलायन वाले अन्य राज्यों में राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा हैं। पिछली जनगणना के मुताबिक देश के दो बड़े महानगरों दिल्ली और मुंबई की ओर पलायन करने वालों की कुल संख्या 9.9 मिलियन थी, जो कि वहाँ की आबादी का लगभग एक तिहाई हिस्सा था। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में कुल 45 करोड़ से ज्यादा प्रवासी हैं। 1991 जनगणना के मुताबिक तब प्रवासियों की संख्या 22  करोड़ थी, जिसका मतलब है कि 1991 से 2011 के बीच प्रवासियों की संख्या में लगभग दो गुनी बढ़ोत्तरी हुई है। 

खतरनाक और जोखिमपूर्ण ट्रेंड

उक्त आकड़ों को आधार बनाकर कोरोना काल में यदि गांट लौटने वाले प्रवासियों की संख्या का अनुमान लगाया जाए तो, जो आकड़ा सामने आयेगा, वह बेहद चौकाने वाला होगा। वर्तमान ट्रेंड और उक्त आंकड़ों के आधार पर यदि गांव लौटने वाले लोगों की संख्या और कोरोना संक्रमण का विश्लेषण किया जाए तो भावी स्थित बेहद खतरनाक और जोखिमपूर्ण नजर आती है और जो तस्वीर सामने आती है, वह सरकार को भी संकट में डालने वाली हो सकती है।

अचानक हॉटस्पॉट बना बाराबंकी

यदि अकेल उत्तर प्रदेश की बात की जाए तो यूपी में कोरोना संक्रमितों की संख्या 5500 से अधिक हो गयी है। गुरूवार को रिकार्ड 341 नये मामले सामने आये।  बुधवार को पूरे राज्य में कोरोना के कुल 294 पॉजीटिव केस सामने आये, जिसमें लगभग 200 केस प्रवासियों से जुड़े हुए हैं। आश्चर्यजनक बात यह है कि कुछ दिनों पहले ग्रीन जोन वाले यूपी के बाराबंकी जिले में प्रवासी श्रमिकों के आने के बाद कोरोना बम जबरदस्त तरीके से फूटा है। 15-16 मई को बाराबंकी में 245 लोगों के सैंपल लिए गए थे, बुधवार को आयी रिपोर्ट में 95 लोग पाजिटिव पाये गये। पॉजीटिव पाये गये लोगों में 50 फीसदी से अधिक लगभग 49 लोग प्रवासी हैं, जो हाल में ही यहां लौटे हैं। 

सैंपलिंग की संख्या बढाई जानी जरूरी

यूपी समेत देश के कई राज्यों में कोरोना सैंपलिंग लेने की स्पीड काफी धीमी बतायी जा रही है। अंदेशा जताया जा रहा है कि सैंपलिंग बढने के साथ संक्रमण के नये मामले तेजी से सामने आ सकते हैं। ऐसे में गांव लौटे प्रवासियों की शीघ्र सैंपलिंग करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिये, ताकि समय रहते पॉजीटिव केसों को पहचाना जा सके और कोरोना को बड़े पैमाने पर फैलने से रोका जा सके। प्रवासियों की तत्काल जांच, सैंपलिंग कार्य बढाये जाना जरूरी है। इसके अलावा गांव या आबादी से दूर 14-15 दिन का आइसोलेशन का पालन प्रवासियों द्वारा कड़ाई से करवाना जरूरी है। 
 

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