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उच्चतम न्यायालय ने कहा कि सरकारी तंत्र को अपने नागरिकों को संविधान के तहत प्रदत्त अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। पढ़ें पूरी रिपोर्ट डाइनामाइट न्यूज़ पर
नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने कहा कि सरकारी तंत्र को अपने नागरिकों को संविधान के तहत प्रदत्त अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने ‘लॉ इंटर्न’ सोनू मंसूरी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में अब तक की गई जांच पर मध्य प्रदेश सरकार से एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा। इस इंटर्न का प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के साथ कथित तौर पर संबंध है।
युवती इंदौर की एक अदालत में कार्यवाही के फिल्मांकन के लिए 28 जनवरी से जेल में थी और शीर्ष अदालत ने 22 मार्च को उसे जमानत दे दी थी।
पीठ ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से कहा, ‘‘सरकारी तंत्र को नागरिकों के अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। संविधान के तहत स्वतंत्रता की रक्षा की जाती है और सरकार अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए बाध्य है।’’
शुरुआत में, नटराज ने कहा कि मामले की जांच चल रही है और सरकार अब तक की गई जांच पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करेगी। प्राथमिकी में मंसूरी को नामजद आरोपी बनाया गया है।
पीठ ने कहा कि राज्य को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मामले की स्वतंत्र जांच हो।
उसने मामले की सुनवाई के लिए 11 मई की तारीख तय की तथा राज्य सरकार से महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा।
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