
मोरबी: गुजरात के मोरबी में मच्छु नदी पर बना केबिल ब्रिज हादसे में जान गंवानों वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अब तक 130 से अधिक लोगों के शव बरामद किये जा चुके हैं। 170 से अधिक लोगों को बचाया गया है। कई बच्चों ने मोरबी ब्रिज हादसे में अपने मां-बाप को खो दिया है। कुछ लोग अब भी लापता बताये जा रहे हैं। ब्रिज निर्माता कंपनी पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया है।
इस हादसे को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। इसे गुजराती नव वर्ष पर महज 5 दिन पहले ही रिनोवेशन के बाद चालू किया गया था। रिनोवेशन के बाद भी इतना बड़ा हादसा होने पर अब कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि फिटनेस सर्टिफिकेट लिए बिना ही ब्रिज को शुरू कर दिया गया था।
हादसे के बाद रेस्क्यू के लिए सेना, नेवी, एयरफोर्स एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ की टीमें जुटी हुई हैं। अब तक 177 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है।
हादसे में राजकोट से बीजेपी सांसद मोहनभाई कल्याणजी कुंदारिया के 12 रिश्तेदारों की भी इस हादसे में मौत हो गई है।
मोरबी हादसे को लेकर रखरखाव करने वाली एजेंसी के खिलाफ 304, 308 और 114 के तहत क्रिमिनल केस दर्ज किया गया है, आज से ही जांच शुरू की गई है।
बता दें कि यह केबल ब्रिज 100 साल से ज्यादा पुराना बताया जा रहा है। यह ब्रिटिश शासन के दौरान बनाया गया था. राजा-महाराजाओं के समय का यह पुल ऋषिकेश के राम-झूला और लक्ष्मण झूला पुल कि तरह झूलता हुआ सा नजर आता था, इसलिए इसे झूलता पुल भी कहते थे।
Published : 31 October 2022, 11:17 AM IST
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