Govardhan Puja में क्यों चढ़ाए जाते हैं भगवान को 56 भोग? जानिए पौराणिक रहस्य

By Saumya Singh

Source: Google

गोवर्धन पूजा में 56 भोग और अन्नकूट की परंपरा भगवान श्रीकृष्ण की उदारता और सुरक्षा भावना का प्रतीक मानी जाती है। यह न केवल भक्ति की अभिव्यक्ति है, बल्कि जीवन में समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा लाने का माध्यम भी है।

56 भोग की परंपरा- श्रीकृष्ण को 56 प्रकार के व्यंजन अर्पित करने की परंपरा उनकी लीलाओं से जुड़ी है, जो भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।

अन्नकूट का अर्थ- 'अन्नकूट' यानी अन्न का पर्वत, जिसे तरह-तरह के अनाज, सब्जियों और व्यंजनों से सजाया जाता है।

भोग में क्या-क्या शामिल है- दालें, सब्जियाँ, मिठाइयाँ, फल, चावल, पूड़ी, पकोड़े आदि 56 अलग-अलग व्यंजन बनाए जाते हैं।

धार्मिक महत्व- यह प्रसाद श्रीकृष्ण की कृपा और जीवन में विविधता व समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

आध्यात्मिक उद्देश्य- भोग अर्पण से आत्मिक संतुलन, शुभ ऊर्जा और देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।

सामाजिक संदेश- यह परंपरा हमें सिखाती है कि भक्ति में विविधता, उदारता और संपूर्ण समर्पण जरूरी है।