इन किताबों से लोगों को मिलेगी भारतीय संस्थाओं की गहन जानकारी

आधुनिक भारत की नींव तैयार करने वाली संस्थाओं पर आधारित एक नयी किताब से हमारी समझ बढ़ती है कि वे कैसे काम करती हैं और वे अक्सर नाकाम क्यों हो जाती हैं। पढ़िये पूरी खबर डाइनामाइट न्यूज़ पर

Post Published By: डीएन ब्यूरो
Updated : 18 April 2023, 7:21 PM IST

नयी दिल्ली: आधुनिक भारत की नींव तैयार करने वाली संस्थाओं पर आधारित एक नयी किताब से हमारी समझ बढ़ती है कि वे कैसे काम करती हैं और वे अक्सर नाकाम क्यों हो जाती हैं।

इसके साथ ही इस किताब में यह भी जिक्र है कि कैसे बदलाव जितना नागरिकों का काम है उतना ही सरकार के भीतर सुधारवादियों का।

अर्थशास्त्री सुभाशीष भद्र ने अपनी किताब 'केज्ड टाइगर: हाउ टू मच गवर्नमेंट इज होल्डिंग इंडियंस बैक' में महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं का जिक्र किया है।

भद्र के अनुसार प्रचलित धारणा के विपरीत, पिछली पीढ़ियों की अपेक्षा युवा पीढ़ी राजनीति से अधिक जुड़ी है लेकिन राजनीति में ध्रुवीकरण होने के कारण वे सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने में संकोच करते हैं।

लेखक के अनुसार 'केज्ड टाइगर' व्यक्तित्व संबंधी राजनीति के जाल से बचने का एक प्रयास है और सबसे जटिल समस्याओं को देखने के लिए एक नया तरीका अपनाया गया है।

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार,  वह कहते हैं, 'हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक युवा हितधारक के रूप में, मेरा मानना है कि भारत का भविष्य इसके सार्वजनिक संस्थानों की गुणवत्ता से जुड़ा हुआ है।

ब्लूम्सबरी इंडिया द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में अन्य बातों के साथ ही हमारे जीवन में अत्यधिक सरकारी नियंत्रण के प्रभाव का भी जिक्र किया गया है तथा यह हमारे नियामकों के कामकाज में 'लोकतांत्रिक कमी' को उजागर करती है। इसके साथ ही यह किताब पुरातन कानूनों का भी जिक्र करती है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उनके प्रभाव, इतिहास के पुनर्लेखन के प्रयास और राज्यपालों की भूमिका जैसे विषयों को भी शामिल करती है।

पुस्तक आधुनिक भारतीय संस्थानों की उत्पत्ति की खोज करते हुए ब्रिटिश राज तक जाती है। प्रकाशक के अनुसार, संक्षेप में, यह किताब महत्वपूर्ण मुद्दों के बारे में जागरूक बनने के लिए एक मार्गदर्शक है।

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  • 18 April 2023, 7:21 PM IST