अक्षय पात्र हिंदू परंपरा में समृद्धि, धन और अन्न का अटूट स्रोत माना जाता है।
अक्षय पात्र को धन, अन्न और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसे माता लक्ष्मी और मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद प्राप्त करने का माध्यम समझा जाता है।
हिंदू धर्म में अक्षय पात्र को बहुत पवित्र और शुभ माना गया है। यह घर में कभी भी अन्न और धन की कमी न होने का प्रतीक है।
चावल (अक्षत), 3 सिक्के, हल्दी-कुमकुम और लाल-पीला कपड़ा जरूरी हैं। इसके साथ 93 गोमती चक्र, 3 कमल गट्टा, नागकेसर और धनिया बीज भी रखें।
इसे अक्षय तृतीया के दिन बनाना सबसे शुभ माना जाता है। सुबह सूर्योदय के बाद या शुभ मुहूर्त में इसे तैयार करें।
पात्र को गंगाजल या साफ पानी से शुद्ध करके तिलक लगाएं। सामग्री डालते समय “ॐ श्री हीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्मयै नमः” मंत्र का जाप करें।
अन्न की कमी दूर करने के लिए मां अन्नपूर्णा का मंत्र जरूर बोलें। इस विधि से घर में सुख, शांति और समृद्धि हमेशा बनी रहती है।