Google Meet आउटेज ने फिर जताई इंटरनेट की कमजोरी, जानें क्यों और कैसे छोटी तकनीकी गड़बड़ियों से हिल जाता है पूरा सिस्टम

Google Meet के ताजा आउटेज ने फिर साबित कर दिया कि इंटरनेट कितना संवेदनशील है। Cloudflare, AWS और Google Cloud जैसे कुछ प्लेटफॉर्म्स पर निर्भरता डिजिटल दुनिया को कमजोर बनाती है। जानें क्यों एक छोटी तकनीकी गड़बड़ी वैश्विक आउटेज का कारण बन जाती है।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 29 November 2025, 2:03 PM IST
google-preferred
New Delhi: इंटरनेट आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का सबसे भरोसेमंद हिस्सा बन चुका है, लेकिन इस भरोसे के पीछे एक कड़वी सच्चाई भी छिपी है। हाल ही में दोपहर करीब 12:30 बजे Google Meet अचानक कुछ मिनटों के लिए ठप पड़ गया, जिससे लाखों यूजर्स की मीटिंग्स, ऑनलाइन क्लासेस और ऑफिस वर्क बीच में रुक गए। इससे पहले भी ChatGPT, X (ट्विटर) और कई अन्य बड़े प्लेटफॉर्म आउटेज का सामना कर चुके हैं। हर बार एक ही सवाल उठता है क्या डिजिटल दुनिया उतनी मजबूत नहीं जितनी दिखाई देती है?

इंटरनेट वास्तव में कितना कमजोर है?

बाहर से इंटरनेट एक विशाल और हाई-टेक प्रणाली लगता है, लेकिन इसके पीछे बेहद जटिल और कई बार हैरान करने वाला कमजोर ढांचा काम करता है। किसी एक जगह थोड़ी सी गड़बड़ी भी वैश्विक आउटेज का कारण बन सकती है:
  • DNS में दिक्कत
  • सर्वर पर अधिक लोड
  • सॉफ्टवेयर अपडेट में बग
  • फाइल करप्ट होना
  • गलत कोड का लागू हो जाना
ये समस्याएं चेन रिएक्शन की तरह फैलती हैं और मिनटों में लाखों यूजर्स प्रभावित हो जाते हैं।

Cloudflare की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?

यूजर्स को लगता है कि वे सीधे किसी वेबसाइट तक पहुंचते हैं, लेकिन हकीकत में Cloudflare इंटरनेट का ट्रैफिक कंट्रोलर और सिक्योरिटी गार्ड है।

Cloudflare करता क्या है?

  • दुनिया भर में अपने डेटा सेंटर्स में वेबसाइटों की कॉपी रखता है
  • यूजर को निकटतम सर्वर से डेटा देकर स्पीड बढ़ाता है
  • बड़े पैमाने पर DDoS हमलों से सुरक्षा देता है
  • वेबसाइट ट्रैफिक का लोड बैलेंस करता है
लेकिन समस्या तब होती है जब यही सिस्टम खुद गड़बड़ी का शिकार हो जाए।

Cloudflare डाउन क्यों होता है?

  • किसी अपडेट के दौरान फाइल करप्ट होना
  • Bot Management सिस्टम में अचानक बग सक्रिय हो जाना
  • एक सर्वर पर अचानक ज्यादा लोड पड़ जाना
  • रूटिंग एरर
ये साइबर हमले नहीं बल्कि इंटरनेट की अपनी तकनीकी कमजोरियां हैं, जिन्हें लोग अक्सर गलत समझ लेते हैं।

इंटरनेट की रीढ़ अब चंद कंपनियों के हाथ में

आज वैश्विक इंटरनेट चार बड़ी कंपनियों पर निर्भर है:
  • AWS (Amazon Web Services)
  • Google Cloud
  • Microsoft Azure
  • Cloudflare
इसे “Single Point of Failure” कहा जाता है। इनमें से किसी एक में भी समस्या आए तो असर पूरे विश्व में महसूस किया जाता है।

भारत के लिए खतरा और भी ज्यादा बड़ा

भारत में आज लगभग हर सेवा डिजिटल है:
  • UPI पेमेंट
  • बैंकिंग
  • ई-कॉमर्स
  • स्टॉक ट्रेडिंग
  • सरकारी पोर्टल
एक आउटेज देशभर की सेवाओं को प्रभावित कर सकता है, इसलिए अधिक मजबूत बैकअप और वैकल्पिक प्रणाली की जरूरत है।

समाधान क्या है?

कंपनियों को अब सिर्फ स्पीड नहीं बल्कि भरोसेमंद डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाना होगा:
  • Multi-Cloud Strategy (AWS + Azure + Google Cloud जैसे विकल्प)
  • Multi-CDN Setup
  • डेटा सेंटर बैकअप
  • स्मार्ट ट्रैफिक रूटिंग
इससे किसी एक प्लेटफॉर्म के डाउन होते ही ट्रैफिक को दूसरे रास्ते भेजा जा सकेगा।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 29 November 2025, 2:03 PM IST

Related News

No related posts found.