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फीफा वर्ल्ड कप 2026
USA: फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 की संयुक्त मेज़बानी अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको कर रहे हैं। लेकिन यह महाकुंभ दर्शकों और उन स्थानीय सरकारों के लिए बेहद महंगा साबित हो रहा है, जिन पर दुनिया भर से आने वाले फुटबॉल प्रेमियों की मेज़बानी का ज़िम्मा है। फीफा (FIFA) अक्सर गर्व से दावा करता है कि "फुटबॉल दुनिया को जोड़ता है", लेकिन इस साल के टूर्नामेंट को देखकर लगता है कि यहाँ सिर्फ एक खास अमीर वर्ग के प्रशंसक ही जुट पाएंगे। इस खेल के सबसे जुनूनी और आम समर्थक आसमान छूती कीमतों के कारण स्टेडियम से बाहर रहने को मजबूर हैं।
टिकटों के रीसेल (Secondary Market) बाजार का हाल तो और भी चौंकाने वाला है। मई के मध्य में फीफा के रीसेल प्लेटफॉर्म पर 19 जुलाई को न्यूयॉर्क के बाहरी इलाके में स्थित मेटलाइफ़ स्टेडियम में होने वाले फाइनल मैच का सबसे सस्ता टिकट $9,200 (लगभग 7.6 लाख रुपये) में लिस्ट था। वहीं, इसके लिए अधिकतम मांगी गई कीमत $11,499,998.55 तक पहुँच गई (इसे बेचने की कोशिश करने वाले के हौसले को वाकई दाद देनी होगी!)।
मैच के दिनों में यातायात की लागत भी आम जनता की जेब पर भारी पड़ रही है। न्यू जर्सी ट्रांजिट (NJ Transit) ने अप्रैल में घोषणा की थी कि मैच वाले दिन पेन स्टेशन से मेटलाइफ़ स्टेडियम तक की यात्रा के लिए वह प्रति यात्री $150 वसूलेगा। बता दें कि इस सफर का सामान्य किराया महज $13 होता है। हालांकि, भारी विरोध के बाद मई में इस किराए को घटाकर $98 कर दिया गया।
फीफा ने इस बार 'डायनामिक प्राइसिंग' (मांग के आधार पर कीमतें तय करना) का मॉडल अपनाया है, जैसा कि आमतौर पर हवाई टिकटों की बुकिंग के समय देखा जाता है। इसके तहत टिकटों के दाम रियल-टाइम में बदलते रहते हैं। उदाहरण के लिए, मई में कैलिफ़ोर्निया के सोफ़ाई स्टेडियम में पैराग्वे के खिलाफ अमेरिकी टीम के पहले मैच के लिए ऊपरी स्तर (Upper-tier) की एक साधारण सीट का टिकट $1,940 में बिक रहा था।
इसके अलावा, फीफा का अपना रीसेल प्लेटफॉर्म खरीदार और विक्रेता दोनों से 15% का अतिरिक्त शुल्क वसूल रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि टिकट जितनी बार हाथ बदलेगा, फीफा की तिजोरी उतनी ही ज़्यादा भरेगी। नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी के डामोर-मैककिम स्कूल ऑफ बिजनेस की प्रोफेसर केट एशले कहती हैं, "इसमें कहीं न कहीं व्यावसायिक लालच साफ़ दिखाई देता है।"
इस ऊंचे दाम वाले मॉडल को सही ठहराते हुए फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने अमेरिका के मजबूत रीसेल मार्केट का हवाला दिया है। उनका तर्क है कि चूंकि टिकटों के सेकेंडरी प्लेटफॉर्म पर दाम बढ़ने ही हैं, इसलिए संगठन शुरुआती बिक्री में ही उन आंकड़ों के करीब पहुँचने की कोशिश कर रहा है।
फीफा की यह रणनीति उल्टी भी पड़ सकती है। अब भी भारी संख्या में टिकट बिना बिके पड़े हैं। मिसाल के तौर पर, मैसाचुसेट्स के फॉक्सबोरो में 13 जून को हैती और स्कॉटलैंड के बीच होने वाले ग्रुप-स्टेज मैच के लिए $1,300 की फ्रंट-लेवल सीट खरीदने का जोखिम शायद ही कोई उठाना चाहेगा।
इस भारी-भरकम खर्च को देखकर पर्यटक भी यात्रा करने से कतरा रहे हैं। 'अमेरिकन होटल एंड लॉजिंग एसोसिएशन' की मई की शुरुआत में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, मेजबान शहरों के लगभग 80% होटल व्यवसायियों ने माना कि बुकिंग उम्मीद से काफी कम है। इस बार घरेलू यात्रियों की संख्या अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों से अधिक रहने का अनुमान है, जो उन महानगरों के लिए चिंता का विषय है जो वर्ल्ड कप से बड़े आर्थिक उछाल की उम्मीद लगाए बैठे थे। दरअसल, विदेशी पर्यटक होटलों, रेस्तरां और स्थानीय बाजारों में खुलकर खर्च करते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।
बहरहाल, इस महंगे वर्ल्ड कप का लुत्फ उठाने के लिए प्रशंसक कुछ 'जुगाड़' भी कर रहे हैं। Ticketdata.com के अनुसार, मई के मध्य में ग्रुप-स्टेज मैचों के लिए रीसेल मार्केट में टिकटों की कीमतें औसतन 20% तक गिरी हैं। ऐसे में बेहतर डील्स के लिए आखिरी वक्त तक इंतजार करना एक समझदारी भरा विकल्प हो सकता है।
इसके अलावा, मेजबान शहर अटलांटा के 'सेंटेनियल ओलंपिक पार्क' जैसी जगहों पर मुफ्त 'फैन फेस्ट' और 'वॉच पार्टियों' का आयोजन किया जा रहा है।
न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी (NYU) के टिश इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल स्पोर्ट के प्रोफेसर ली इगेल कहते हैं, "मैच के दौरान स्टेडियम के भीतर होना बेशक एक शानदार अनुभव है, लेकिन कई बार स्टेडियम के बाहर या उससे थोड़ी दूर रहकर, खेल के दीवानों की भीड़ के बीच मैच का आनंद लेना भी उतना ही रोमांचक होता है।"
Location : USA
Published : 9 June 2026, 11:07 AM IST
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